गुरुओं ने ही पढ़ाया मानवता और समरसता का पाठ

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गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर समरसता सेवा संगठन ने किया श्री गुरु चरण वंदन समारोह एवं भजन संध्या का आयोजन

गुरु हमें ज्ञान देकर अहंकार और भेद-भाव मिटाना सिखाते हैं, संत समाज हमेशा से जाति, ऊंच-नीच और वर्ग के बंधनों से ऊपर उठकर मानवता और समरसता का पाठ पढ़ाते आये है, यह बात वक्ताओ ने समरसता सेवा संगठन द्वारा गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर आयोजित श्री गुरु चरण वंदन समारोह एवं भजन संध्या के अवसर पर सिटी बंगाली क्लब, करमचंद चौक में कही।समरसता सेवा संगठन द्वारा आयोजित समारोह में पूज्य संत महामण्डलेश्वर स्वामी श्री अखिलेश्वरानंद गिरी जी महाराज, जगतगुरू श्री राजारामाचार्य, स्वामी डॉ मुकुंददास जी महाराज, स्वामी श्री कालीनंद जी महाराज, साध्वी दीदी ज्ञानेश्वरी जी, महंत श्री चंद्रशेखरानंद जी महाराज, श्री पगलानंद जी महाराज, स्वामी श्री गिरिजानंद जी महाराज, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ब्रह्मचारिणी बहन भावना दीदी का चरण पूजन समरसता सेवा संगठन के संस्थापक अध्यक्ष एवं जेडीए अध्यक्ष श्री संदीप जैन, संगठन के अध्यक्ष श्री पवन पांडे, सचिव श्री मनोज सेठ के साथ सभी सदस्यों एवं आगँटतुक जनों ने किया।समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री पवन पांडे ने स्वागत उद्बोधन एवं कार्यक्रम की प्रस्तावना देते हुए कहा समरसता सेवा संगठन द्वारा इस वर्ष के कार्यकाल में प्रत्येक माह एक कार्यक्रम आयोजित किये जाने का निर्णय लिया गया था इसी तारतम्य में गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर पूर्व संध्या पर संस्कारधानी वासियों को अपने-अपने गुरु जनों की पूजा-अर्चना एक ही स्थान पर करने का सौभाग्य प्राप्त आज हो रहा है जिसमे धर्मक्षेत्र के सभी गुरुजन समरसता सेवा संगठन के मंच पर विराजमान है, जिसमे विधि-विधान से गुरुशक्ति का पूजन-वंदन किया गया जिसमे आगँतुक जन भी गुरुवंदन कर रहें है।कार्यक्रम में वक्ताओ ने कहा भारतीय पुरातन ग्रन्थों के अनुसार गुरू का अर्थ अन्धकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश देने वाला होता है। गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले होते हैं। आर्य सनातन वैदिक धर्मानुसार जो विद्यायुक्त ज्ञान का उपदेश कर्ता हैं वो जो वेदों का सृष्टि के आदि में ऋषियों को उपदेश कर्ता हैं और वह उन ऋषियों का भी गुरु हैं उस गुरु का नाम परमात्मा है। फिर भी लोक में विद्यादाता को गुरु कहा गया है ।वक्ताओ ने कहा मान्यतानुसार गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार संभव हो पाता है और गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं हो पाता । जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। इसलिए आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूजा का विधान है और इस दिन को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। वक्ताओ ने कहा गुरु तथा देवता में समानता स्थापित करते हुए कहा गया है कि जैसी भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है।*मंच पर विराजित गुरु जनों का सभी ने किया पूजन :-* कार्यक्रम में मंच पर एक साथ विराजित सभी संतो का चरण पूजन कर सभी ने आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम के उपरांत सभी जनो ने भोग प्रसादी ग्रहण की।*भजनो ने मन मोहा :-* गुरु चरण पूजन कार्यक्रम के दौरान भजन गायक रवि शुक्ला, भजन गायक मिठाईलाल चक्रवर्ती की टीम ने शानदार भजनो की प्रस्तुति दी और लोगो ने गुरु पूजन के साथ भजनो का भी आनंद लिया.कार्यक्रम में पं रोहित दुबे, पं ब्रजेश दीक्षित, प्रमोद ताम्रकार जगदीश चोहटेल, पं आशुतोष दीक्षित, डॉ पी के अग्रवाल, विनय असाठी, गिरीश वर्मा, विनय केसरवानी, मुकेश साहू, प्रदीप चौकसे, लक्ष्मण कोरी, जेडीए उपाध्यक्ष प्रशांत केसरवानी, एमआईसी सदस्य रजनी कैलाश साहू, सीमा सिंह, के साथ सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर गुरु चरण पूजन किया।

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