जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में कृषि वानिकी बनेगी प्रभावी विकल्प-डॉ. एस.के. ध्यानी
जलवायु अनुकूल कृषि और हरित अर्थव्यवस्था विषय पर व्याख्यान संपन्न
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा की प्रेरणा से वानिकी विभाग द्वारा “कृषि वानिकी जलवायु परिवर्तन के दौर में जलवायु अनुकूल कृषि और हरित अर्थव्यवस्था” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन स्वामी विवेकानंद सभागार में अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. धीरेन्द्र खरे के मुख्यआतिथ्य एवं अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. अल्पना सिंह की अध्यक्षता में और वानिकी विभाग के विभागाध्यक्ष व आचार्य डॉ. अजय कुमार खरे के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यवक्ता के रूप में पूर्व निदेशक, आईसीएआर-सीएएफआरआई डॉ. एस.के. ध्यानी ने पॉवर प्वॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि कृषि वानिकी खेतों को मौसम की मार से बचाने के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच तैयार करती है, जो कि मृदा स्वास्थ्य और जैविक कार्बन में सुधार, जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण, फसल सुरक्षा, पारिस्थिति विविधता प्रदान करता है। इसके साथ ही कार्बन पृथक्करण, संसाधनों में आत्म निर्भरता, टिकाऊ आजीविका और हरित रोजगार में भी अहम भूमिका अदा करने पर विस्तारपूर्वक, महत्वपूर्ण एवं रोचक जानकारी प्रदान की।मुख्यअतिथि अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. धीरेन्द्र खरे ने 2047 में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि भविष्य में कृषि जोत छोटा होगा, इसके लिए समुचित यांत्रिकीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके अलावा कम जमीन में अधिक पैदावार के लिए संसाधनों के कुशल और दक्ष उपयोग पर जोर दिया है।गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विष्णु सोलंकी एवं आभार प्रदर्शन डॉ. यशपाल सिंह द्वारा कियाइस अवसर पर संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. अश्वनी जैन, डॉ. ब्रजेश दीक्षित, डॉ. अनुभा उपाध्याय, डॉ. ज्ञानेन्द्र तिवारी, डॉ. बी.एस.द्विवेदी, डॉ. सोमनाथ सर्वदे, डॉ. राजेन्द्र डोंगरे, डॉ. राहुल डोंगरे सहित प्राध्यापक, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
