वानिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.बी. अग्रवाल हुए सेवानिवृत्त कुलपति डॉ. पी. के. मिश्रा ने दी विदाई

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जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर स्थित कृषि महाविद्यालय, जबलपुर के वानिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डॉ. सुरेश बाबू अग्रवाल 40 वर्ष की दीर्घकालीन सेवा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए। डॉ. एस.बी.अग्रवाल को विभाग के वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों द्वारा साल, श्रीफल, रोली का टीका एवं गुलदस्ता और फूल माला पहनाकर स्वागत अभिनंदन किया गया। डॉ. अग्रवाल की सेवानिवृत्ति के अवसर पर कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा के मुख्यआतिथ्य में वानिकी विभाग द्वारा अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. टी.आर.शर्मा, संचालक शिक्षण डॉ. अभिषेक शुक्ला, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. जयंत भट्ट, कुलसचिव डॉ. ए. के. जैन, उपलेखानियंत्रक डॉ. अजय खरे, संचालक प्रक्षेत्र डॉ. विजय यादव, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश बाजपेयी उपस्थित रहे।इस दौरान कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. अग्रवाल अपनी विश्वविद्यालयीन सेवा के दौरान विभिन्न दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी पूर्वक किया है. आपने किसानों, विद्यार्थियों एवं अपने सहयोगी वैज्ञानिकों के साथ बडी सहजता एवं धैर्य से कार्य किया है। जिसके कारण आज आपकी सेवानिवृत्ति पर विश्वविद्यालय को आपकी कमी हमेशा रहेगी। आपके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं एवं बधाई देते हैं।गौरतलब है कि डॉ. अग्रवाल ने विश्वविद्यालयीन सेवा सन् 1985 में चारा अनुसंधान परियोजना, जबलपुर से प्रारंभ की। इसके बाद आप 2007 में कृषि विज्ञान केन्द्र, जबलपुर में विशेषज्ञ के रूप में पदस्थ हुए और 2017 में सह प्राध्यापक सस्य विज्ञान के रूप में कृषि महाविद्यालय, बालाघाट वारासिवनी में पदस्थ हुए। इसके 4 वर्ष बाद कृषि महाविद्यालय, जबलपुर मे स्थानांतरित हुए और वानिकी विभाग में कृषि वानिकी परियोजना के प्रधान अन्वेषक नियुक्त किए गए। इसके बाद विभागाध्यक्ष वानिकी विभाग के पद को भी सुशोभित किया। डॉ. एस.बी. अग्रवाल को चारा अनुसंधान, जैविक आदान उत्पादन तथा जैविक कृषि के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। डॉ. अग्रवाल ने जैविक खेती एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर बहुत ही उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आपको आईसीएआर द्वारा वर्ष 2010 में श्रेष्ठ केवीके क्षेत्रीय संस्थान पुरस्कार, वर्ष 2018 में श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार और वर्ष 2019 में उत्कृष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार के साथ ही वर्मी कम्पोस्टिंग के क्षेत्र में आपके उल्लेखनीय योगदान हेतु 2008 में भूमि निर्माण पुरस्कार जैसे कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किये जा चुके हैं। आपने 25 कृषि स्नातकोत्तर एवं 11 पीएचडी छात्रों को शोध कार्य में मार्गदर्शन प्रदान किया है। आपके राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में 100 से भी अधिक समीक्षित शोध पत्रों का प्रकाशन किया गया है। प्रकाशन की इस कड़ी में 03 पुस्तकें, 05 शोध पत्रिकाएं, 15 प्रसार बुलेटिन एवं 03 अभ्यास पुस्तिकाएं भी प्रकाशित की गई है। डॉ. एस.बी.अग्रवाल ने अपने शोध एवं कृषि विस्तार अनुभव के तहत ब्राजील, नीदरलैंड, इजराइल, नेपाल आदि देशों की सफल यात्रा की है।डॉ. एस.बी.अग्रवाल की सेवानिवृत्ति के अवसर पर डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. राहुल सिंह डोंगरे, डॉ. सोमनाथ सर्वेदे, डॉ. राजेन्द्र सिंह डोंगरे, डॉ. विष्णु सोलंकी, डॉ. मनोज पाठक सहित कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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