जनेकृविवि द्वारा किसानों को दिया गया वृक्ष जनित तिलहनप्रशिक्षण
वैज्ञानिकों ने दी उन्नत खेती एवं पर्यावरण संरक्षण की जानकारी
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा की प्रेरणा से एवं वानिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय खरे के मार्गदर्शन में वानिकी विभाग के वैज्ञानिकों ने राज्य योजना परियोजना (TBOS) के अंतर्गत वारासिवनी तहसील के ग्राम दैतबर्रा में किसानों के लिए एक दिवसीय वृक्ष जनित तिलहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ. सोमनाथ सरवदे, डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. अतुल श्रीवास्तव, डॉ. शैलेंद्र भालावे, डॉ. ऋषिकेश ठाकुर एवं डॉ. एस. के. राय ने किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दैतबर्रा के ग्रामीणों एवं कृषकों को वैज्ञानिक कृषि, वृक्ष जनित तिलहन तथा प्राकृतिक संसाधन संरक्षण संबंधी नवीनतम तकनीकों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण के दौरान वृक्ष जनित तिलहनी पौधों जैसे महुआ, नीम, कुसुम तथा करंज के व्यावसायिक महत्त्व, उन्नत वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों, बीज संग्रहण एवं उनसे तेल व जैविक खाद (खली) प्राप्त करने के संबंध में किसानों को विस्तृत जानकारी दी गई। खेत बचाओ अभियान व वर्मी कम्पोस्ट अभियान के अंतर्गत हरी खाद के उपयोग, मृदा उर्वरता और फसल उत्पादकता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके साथ ही केंचुआ खाद निर्माण व उसके उपयोग के लाभ बताए गए। मेड़ों पर वृक्षारोपण फसलों के साथ-साथ खेतों की मेड़ों पर वृक्ष जनित तिलहनी पौधों के रोपण की उपयोगिता पर जोर दिया गया, जिससे जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके। वैज्ञानिकों की देख-रेख में पौधों के वैज्ञानिक रोपण, उनकी सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर किसानों को विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम में सम्मिलित सभी 30 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा वैज्ञानिकों से वृक्ष जनित तिलहन उत्पादन की आधुनिक तकनीकों पर संवाद कर इन्हें अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया।इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अनिल कुमार कोरी एवं श्री आकाश शुक्ला ने विशेष सहयोग प्रदान किया।
