शिक्षित भारत-विकसित भारत,नारी सशक्तिकरण, वृद्ध माता-पिता की सेवा, के संदेश के साथ संभाग स्तरीय प्रदर्शनी का हुआ समापन

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आठ जिलों से चयनित 169 विद्यार्थी जोन (संभाग) स्तरीय प्रदर्शनी में उत्साह पूर्वक की सहभागिता

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान प्राचार्य अजय दुबे ने बताया कि राज्यशिक्षा केंद्र के निर्देश अनुसार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाईट द्वारा दो दिवसीय विज्ञान, गणित,पर्यावरण एवं सामाजिक विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन 28 एवं 29 जनवरी 2026 को डाईट परिसर में किया गया। प्रदर्शनी का समापन पूर्व प्राथमिक प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ राम मोहन तिवारी के मुख्य आतिथ्य में माँ सरस्वती के पूजन, वंदना एवं दीपप्रज्वलन के साथ हुआ. मुख्य अतिथि श्री तिवारी ने जोन स्तर तक पहुंचने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से छात्रों के आत्मविश्वास,प्रतिभा,कौशल प्रदर्शन को बढ़ावा मिलता है। छात्रों में स्वयं करके सीखने की प्रवृत्ति विकसित होती है। ऐसे आयोजन विषय की कठिनता,नीरसता, रटने की प्रवृत्ति को दूर कर शिक्षण को रोचक, प्रभावी,क्रियाशील, एवं व्यवहारिक बनाते है। उन्होंने जोन स्तर पर चयनित विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप राज्य स्तर के लिए चयनित हो व जिन छात्रों का चयन राज्य स्तर के लिए न हो तो वह निराश न हो अपने आगे प्रयास जारी रखें। प्रदर्शनी विज्ञान,गणित, पर्यावरण, सामाजिक विज्ञान विषयों पर बनाए गए मॉडल,लघु नाटिका,एकल गीत और सेमिनार, विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की थीम पर आधारित रही.शाला स्तर से चयनित छात्र-छात्राओं ने जनशिक्षाकेंद्र स्तर पर, जन शिक्षा केंद्र स्तर से विकासखंड स्तर पर एवं विकासखंड स्तर से जिला स्तर तक पहुंचे हैं। संभाग के आठ जिलों से चयनित 169 विद्यार्थी एवं 32 मार्गदर्शी शिक्षक जोन (संभाग) स्तरीय प्रदर्शनी में सहभागिता की। आज द्वितीय दिवस विद्यार्थियों ने शिक्षित भारत-विकसित भारत, वृद्ध माता-पिता की सेवा, बाल श्रम एक अभिशाप, बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ, पेड़ बचाओ-पेड़ लगाओ, नारी सशक्तिकरण, झांसी की रानी की वीरता, पर्यावरण संरक्षण,जल संरक्षण धरती मां कहे पुकार रसायनों का न करें उपयोग आदि संदेश पर आधारित लघु नाटिका का प्रस्तुतीकरण किया। प्रदर्शनी के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य गतिविधि आधारित शिक्षण को प्रोत्साहन, प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना,अवशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता का स्वस्थ जीवन के लिए महत्व पर आधारित सेमिनार,पर्यावरण संरक्षण से संबंधित स्थानीय एवं स्वरचित एकल गीत, नारी सशक्तिकरण,सोशल मीडिया के दुरुपयोग, स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति आदि पर आधारित लघु नाटिका, मॉडलों के माध्यम से छात्र-छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण के साथ मानवीय, सामाजिक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है। विद्यार्थियों द्वारा उत्साह पूर्वक सहभागिता कर विज्ञान, गणित,पर्यावरण, सामाजिक विज्ञान विषयों पर आधारित प्रमुख रूप से आत्मनिर्भर भारत वोकल कॉर लोकल,आधुनिक कृषि, उभरती प्रौद्योगिकी,भारतीय लोकतंत्र, मतदान जागरूकता, लघु एवं कुटीर उद्योग,परिवार एवं समुदाय, मानव अधिकार, वायुमंडल, मिट्टी की परतें, हमारी पृथ्वी, सौरमंडल,जल संरक्षण,जल शुद्धियंत्र, भूकंप, ज्वालामुखी, मनोरंजक, गणितीय गतिविधियां, प्रायिकता, पाइथागोरस प्रमेय, कोणों के प्रकार, भिन्न,वृत्त,गणित पार्क, संख्या रेखा,ज्यामिति आकृतियां, द्विविमीय, त्रिविमीय आकृतियां, संतुलित आहार, भोजन के स्रोत, पर्यावरण संरक्षण,अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक के विकल्प, हड़प्पा संस्कृति,सिंधु घाटी की सभ्यता,पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत आदि पर आधारित मॉडल बनाए गए. प्रदर्शनी में विशिष्ट अतिथि उपसंचालक लोक शिक्षण जबलपुर संभाग डॉ पी.पी.सिंह,डाईट प्राचार्य अजय दुबे,प्रदर्शनी नोडल अधिकारी सुनील शर्मा, सहायक प्राध्यापक वाय एन द्विवेदी,एपीसी राजेश तिवारी, व्यावसायिक समन्वयक मनोज काशिव, व्याख्याता केशव दुबे, भावना दुबे कल्पना द्विवेदी सहित समस्त डाईट स्टॉफ, अधिकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में शिक्षक,छात्र उपस्थित रहे।

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