जिले की धधकती आग कहीं प्रदेश की व्यवस्था को ना ले ले चपेट में,सिहोरा के बाद अब स्लीमनाबाद में दहके जिला के शोले
कोई राजनैतिक स्टंट तो नहीं या फिर वाकई आज की आवश्यता है तहसील का जिला में बदलना?
जिला बनने से क्या वाकई विकास होगा? विचार करना जरूरी
थोड़ा अजीब लगता है सुनकर ज़ब हर तहसील को जिला बनाने के लिए आंदोलन की बात उठने लगी है। एक वर्ग इसका समर्थन करता है तो एक वर्ग ऐसा भी है जो इन आंदोलनो को करने वाली सोच पर ठहाके लगता दिख रहा है।अभी हाल ही में सिहोरा को जिला बनाने को लेकर कुछ लोगो नें आंदोलन भी शुरू कार दिया और उसको बड़ा रूप देने भरसक प्रयास भी किये का रहे है। जिसमें कुछ अन्य राजनितिक दल भी समर्थन देने सामने आये है।तो इसकी आग अभी ठीक से सुलगी भी नहीं कि इसकी चिंगारी उस स्थान से महज 20-22 किलोमीटर दूरी पर आखिर इतनी जल्दी कैसे पहुँची होगी। ये शंशय बना हुआ है। आपको जानकार हैरानी होगी कि बिंदु मात्र दिखने वाला स्लीमनाबाद अब अपने अस्तित्व को खोजने निकल पड़ा है। वहां की आवाम उसे जिला घोषित करने के लिए धीरे धीरे पैर पसार रही है। हास्यास्पद यह की कटनी तो स्वयं अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया है जिसमें काफी विकास की जरूरत है लेकिन वहाँ का ध्यान छोड़कर कुछ लोग उसके एक छोटे हिस्से को काटकर जिला बनाने में उतारू है।खैर ये कोई नई बात नहीं क्योंकि ठीक लगभग उतना ही आबादी और क्षेत्रफल वाले मंडला के निवास को भी कई वर्षों से जिला बनाने का प्रयास जारी है।पर देखना यह है की प्रसाशन की नजरों में यह कितना महत्वपूर्ण है?
हालांकि जिला बनने से उस स्थान के हालत कितनी सुधरेगी यह तो जिला बनाने की मांग करने वालों नें विचार किया ही होगा?
क्या है प्रकिया जिला बनाने की –
जिला बनाने की प्रक्रिया मुख्य रूप से एक प्रशासनिक और राजनीतिक प्रक्रिया है जो भारत सरकार या संबंधित राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें कई चरण शामिल होते हैं। प्रक्रिया के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:आवश्यकता और प्रस्ताव (Need and Proposal):यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब किसी मौजूदा जिले का आकार बहुत बड़ा हो जाता है, जिससे प्रशासन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और विकास कार्यों को लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने में कठिनाई होती है।स्थानीय नेता, जन प्रतिनिधि, या राज्य सरकार के अधिकारी नए जिले की आवश्यकता महसूस करते हुए एक प्रस्ताव तैयार करते हैं।राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी (State Cabinet Approval):प्रस्ताव को राज्य के राजस्व विभाग (Revenue Department) या सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा जांचा जाता है।सभी पहलुओं की जांच के बाद, प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखा जाता है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।अधिसूचना (Notification) और गजट प्रकाशन (Gazette Publication):मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद, सरकार “राजपत्र” (Gazette) में एक आधिकारिक अधिसूचना प्रकाशित करती है।इस अधिसूचना में नए प्रस्तावित जिले की भौगोलिक सीमाएं, उसमें शामिल होने वाले तहसील/ब्लॉक के नाम और मुख्यालय की जानकारी दी जाती है।आपत्तियां और सुझाव (Objections and Suggestions):अधिसूचना जारी होने के बाद, सरकार आमतौर पर एक निश्चित समय-सीमा (जैसे 30 से 60 दिन) देती है ताकि प्रभावित क्षेत्रों के नागरिक, संगठन या स्थानीय निकाय इस निर्णय पर अपनी आपत्तियां, सुझाव या दावे प्रस्तुत कर सकें।जांच और अंतिम निर्णय (Inquiry and Final Decision):प्राप्त हुई सभी आपत्तियों और सुझावों की सरकार द्वारा गठित एक समिति या राजस्व बोर्ड द्वारा जांच की जाती है।सभी जांचों और जनमत पर विचार करने के बाद, राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेती है।अंतिम अधिसूचना और गठन (Final Notification and Formation):अंतिम निर्णय के बाद, सरकार एक अंतिम अधिसूचना जारी करती है जिसमें नए जिले के गठन की आधिकारिक घोषणा की जाती है और उसकी सीमाएं निर्धारित की जाती हैं। इसी अधिसूचना के साथ नया जिला आधिकारिक तौर पर अस्तित्व में आ जाता है। ध्यान दें: नए जिले के निर्माण के लिए संसद में किसी कानून को पारित करने की आवश्यकता नहीं होती है। यह पूरी तरह से राज्य सरकार का कार्यकारी निर्णय (Executive Decision) होता है, जो भारतीय संविधान के तहत राज्यों को प्राप्त शक्तियों के आधार पर लिया जाता है।
(AI से प्राप्त जानकारी अनुसार )
दिकेलमर –
हमारी मंशा किसी को विचारिक आहत पहुंचाना नहीं अपितु जन कल्याण के लिए चेताना जरूर है
