60 वर्षों से काबिज भूमि पर बने घर पर तहसीलदार ने की बुलडोजर कार्यवाही, भूस्वामी की गैरमौजूदगी में ढहा दिया गया सपनों का आशियाना
करकेली/रहठा 08/11/2025:-
दिनांक 06 नवंबर को दरमियानी दोपहर तहसीलदार करकेली , अपने पूरे दलबल के साथ जिसमें 6 हल्का पटवारी, नौरोजाबाद पुलिस महिला बल सहित बुलडोजर के साथ रहठा पहुंचकर शासकीय आराजी 433/3 रकबा 0.336 हैक्टेयर के अंश रकवा 0.020 हैक्टेयर भूमि पर बलपूर्वक मकान को ध्वस्त कर दिया।
उक्त जमीन पर 60 वर्षों से काबिज है पीड़ित परिवार
रहठा का मार्केट एरिया ज्यादातर शासकीय भूमि पर काबिज है, जिसको 50 के लगभग परिवार का कई पीढ़ियों से कब्जा चला आ रहा है, जिसमें कई निर्माण कार्य भी हुए जिसमें लोग छोटे मोटे दुकान व्यापार करके अपना भरण पोषण कर रहे हैं। उन्हीं में से एक परिवार नरेश काछी पिता स्व. मिठाईलाल काछी का था जो लगभग 60 वर्षों से एक छोटे से शासकीय भू रकवा 0.020 हैक्टेयर में काबिज थे और उक्त जमीन को अपने नाम कराने के लिए लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। जिनका निर्माण तहसीलदार के द्वेष पूर्ण एकतरफा निर्णय के कारण विगत 06 नवंबर 2025 को पूरे दलबल के साथ पहुंचकर नेस्तनाबूत कर दिया गया।
मेहनत मजदूरी कर परिवार का होता है गुजर बसर, कर्ज लेकर बनवाया था मकान तहसीलदार ने ढहाया
जिस परिवार का मकान तहसीलदार करकेली के द्वारा ढहा दिया गया। वह बेहद गरीबी में जीवन यापन कर रहा था और अपना पेट काट काटकर रिश्तेदारों और ब्याज में कर्ज लेकर 2 कमरे का छोटा सा एल्वेस्टर सीट छाकर बनवाया था। पर उसको द्वेष पूर्ण कार्यवाही के नाम पर नष्ट कर दिया गया। बताया जा रहा है कि जिस वक्त मकान पर बुलडोजर की कार्यवाही की जा रही थी उस समय काबिज भू – स्वामी उमरिया में थे। जिनकी गैरमौजूदगी में जबरन तहसीलदार ने घर पर बुलडोजर चला दिया।
रोते रहे मां और बच्चे आंखों के सामने टूटता रहा आशियाना
लोग दबी जुबान इस कार्यवाही की निंदा कर रहे हैं पर प्रशासन के खिलाफ कौन जा सकता है। प्रशासन आम गरीब बेसहारों का सहारा बनने के लिए होता है, लेकिन गरीब परिवार पर हुई कल की कार्यवाही ने यह साबित कर दिया कि अधिकारी सिर्फ पैसे वालों के लिए होते हैं गरीब के साथ सिर्फ अन्याय हो सकता है, क्योंकि गरीब के पास पैसे, पहुंच और पावर जैसी चीज नहीं होती। इसीलिए गरीब परिवार कल अपने आंखों से अपने हाथों से जमाए ईंटों को बुलडोजर से टूटते देख इतना टूटा कि कल से बह रहे आंसू आज भी थमने का नाम नहीं ले रहे। दो दिनों से परिवार ने खाना पीना भी छोड़ दिया।
5 नवंबर की शाम मिला नोटिस 6 नवंबर को चला दिया बुलडोजर
मकान मालिक को 1 दिन का भी समय नहीं मिला और चल गया बुलडोजर, पावर का नशा ऐसा है, अधिकारी भी गरीबों को सताकर अपनी ताकत का जलवा दिखाते है। इतने से भी साहब का मन नहीं भरा तो बुलडोजर चलाने के बाद निकला मलवा छत की एल्वेस्टर सीट भी ट्राली में लोड कर पंचायत भवन में रखवा दिया गया। इस पूरी कार्यवाही में पंचायत की भूमिका संदिग्ध है इस पूरी मामले में मिलीभगत की बू आ रही है।
करकेली तहसीलदार से बातचीत के कुछ अंश
इस विषय में जब करकेली तहसीलदार से बात की गई तो उन्होंने कहा अभी मैं पूरी जानकारी फाईल देखने के बाद दे पाऊंगा।
1.सवाल:- आपने रहठा में बुलडोजर की कार्यवाही में घर गिराया
जवाब:- हमारे द्वारा कब्जा किया गया बाऊन्ड्री गिराकर कब्जा मुक्त किया गया।
2.सवाल:- मध्यप्रदेश सरकार गरीबों को जो 30 वर्षों से सरकारी भूमि पर काबिज है, को एकमुश्त किस्त के साथ स्थाई निवास करने की पात्रता देती है फिर 60 वर्षों से काबिज भूमि पर बना मकान क्यों गिराया गया।
जवाब:- मुझे इस विषय की कोई जानकारी नहीं है, सरपंच, सचिव और एक रिटायर्ड टीचर की शिकायत मिली थी कि सरकारी भूमि पर कब्जा हुआ है, जिसे खाली कराया गया।
3.सवाल:- रहठा का मार्केट पूरी तरह सरकारी जमीन पर काबिज है कई बड़ी बिल्डिंगे सरकारी जमीन पर बनी है उन पर बुलडोजर क्यों नहीं चलाया कब गिराएंगे बाकी घर
जवाब:- उन सब पर भी नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
