श्री क्षीरेश्वर महादेव…

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श्रावण शिवरात्रि विशेष…

जो अयोध्या रामजन्मभूमि के चार दिशाओं में स्थापित पौराणिक शिवालयों में हैं।

नोट करने वाली बात यह है कि शिवलिंग का केवल श्रृंगार करना चाहिए, पूरा शिवलिंग ही शिवस्वरूप है, उसमें मुंह आंख नाक नहीं बनाने चाहिए!शिला स्वरूप शिव का दर्शन पूजन ही विहित है। परन्तु यह निराशाजनक है कि व्यवसायीकरण के लिए महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी मुंह आंख नाक बनाते हैं। पार्थिव शिवलिंग में भी मुंह आंख नाक बनाने का विधान नहीं हैं। पंडित जी लोग यजमान को प्रभावित करने के लिए पार्थिव शिवलिंग पर स्वांग बनाते हैं तो यजमान महानुभावों आप लोग वैसे ही कंजूसी छोड़कर दक्षिणा दिया करो और पंडित जी को प्रेम से मना करो कि पार्थिव शिवलिंग में कुछ अपनी ओर से न बनायें। जिन परमात्मा को शिला और मिट्टी बनने में संकोच नहीं, हमें उन्हें उसी स्वरूप में पूजने में कैसा संकोच?

– आचार्य सन्तोष, (अयोध्या)

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