जनेकृविवि में विश्व युवा कौशल दिवस पर 8 दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ

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कृषि को टिकाऊ बनाने हेतु मृदा स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता-डॉ. जी.के. कौतु

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा की प्रेरणा से मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग और आसा, भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में टिकाऊ खेती विषय पर 8 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ संचालक अनुसंधान सेवायें डॉ. जी.के. कौतु के मुख्यआतिथ्य, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. अनीता बब्बर की अध्यक्षता एवं डॉ. वरन सिंह वरिष्ट कार्यकम प्रबंधक, आसा, भोपाल के विशिष्ट आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर डॉ. जी. के. कौतु ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि को टिकाऊ बनाने हेतु मृदा स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। खासकर पूर्वी मध्यप्रदेश के क्षेत्रों में जहां लगभग 5 लाख हेक्टेयर क्षरित भूमि होने के साथ-साथ लगभग 5 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल रबी को मौसम में परती रह जाता है। उन्होंने आगे कहा कि इन क्षेत्रों की मृदाओं के स्वास्थ्य में सुधार करके राष्ट्रीय भण्डार में समाधान की आपूर्ति की जा सकती है।कार्यकम की अध्यक्षता कर रही अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. अनीता बब्बर ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की भागेदारी बढ़ती जा रही है। जिसे उपस्थित प्रशिक्षाणार्थियों में देखा जा सकता है। आपने मृदा स्वास्थ्य के साथ-साथ दलहनी फसलों पर जोर दिया, तथा इसे कृषि के टिकाऊ होने में महत्वपूर्ण बताया।मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. एच.के. राय ने कृषि को टिकाऊ बनाए रखने हेतु मृदा एवं जल संरक्षण की प्राथमिकता पर बल दिया। कार्यकम की रूपरेखा प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. बी.एस. द्विवेदी ने दी।डॉ. बरन सिंह, वरिष्ट कार्यक्रम प्रबंधक, आसा, भोपाल ने कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एवं जनेकृविवि के प्रति आभार व्यक्त किया।प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा गायत्री तुरकर एवं आभार प्रदर्शन डॉ. जी.एस. टैगोर, वैज्ञानिक द्वारा किया गया।प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र के अवसर पर डॉ. ए.के. उपाध्याय, डॉ. राकेश साहू, डॉ. अभिषेक शर्मा, डॉ. फूलचंद अमूले, डॉ. किरण पटेल डॉ. शैलू यादव सहित विभाग के समस्त अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस समूचे कार्यक्रम को सफल बनाने में मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डॉ. ब्रजेश दीक्षित और डॉ. के. के. त्रिवेदी, आसा, भोपाल का विशेष योगदान है।

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