मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर भव्य आयोजन, कालजयी साहित्य को पुस्तक प्रदर्शनी के माध्यम से किया गया साकार
श्रम की प्रतिष्ठा’ हमारे संस्थान की कार्य संस्कृति का मूल आधार है : प्रफुल्ल वी. कोहाडे
सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना, निशातपुरा, पश्चिम मध्य रेल, भोपाल में हिंदी के महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर मुख्य कारखाना प्रबंधक श्री प्रफुल्ल वी. कोहाडे के मुख्य आतिथ्य में भव्य कार्यक्रम एवं प्रेमचंद पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा माँ सरस्वती एवं मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर कारखाना की सांस्कृतिक अकादमी के सहायक सचिव श्री प्रेमचंद अजमेरा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जिसमें ढोलक पर श्री गौरव प्रजापति तथा हारमोनियम पर श्री सुनील जैन ने संगत दी।कार्यक्रम के प्रारंभ में संपर्क राजभाषा अधिकारी एवं सहायक कार्मिक अधिकारी श्री संदीप शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा मुंशी प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला।इसके उपरांत मुख्य अतिथि श्री प्रफुल्ल वी. कोहाडे ने फीता काटकर प्रेमचंद पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी की विशेषता यह रही कि इसमें प्रेमचंद की अमर रचनाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी में ‘ईदगाह’ का हामिद का चिमटा, ‘गोदान’ के होरी की गाय, ‘पूस की रात’ का हल्कू का कंबल एवं जबरा, ‘गबन’ की जालपा के आभूषण, ‘ठाकुर का कुआँ’ का जोखू का लोटा, ‘ठाकुर का हुक्का’, ‘दो बैलों की कथा’ के हीरा और मोती तथा ‘पंच परमेश्वर’ की चौपाल सहित अनेक आकर्षक झांकियां प्रदर्शित की गईं। इन रचनात्मक प्रस्तुतियों ने प्रेमचंद के साहित्य को सजीव बना दिया और प्रदर्शनी सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आकर्षण का केंद्र रही। उपस्थित जनों ने प्रदर्शनी की मुक्त कंठ से सराहना की तथा सेल्फी प्वाइंट पर स्मृति चित्र भी लिए।इस अवसर पर श्री हनुमान प्रसाद मीना, श्री मनोज कुमार सिंह, श्री ऋषभ धाकड़, श्री अक्षय गंगरवाल एवं श्री शिवम् असाठी सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी में कारखाना के युवा रेलकर्मी साहित्यकार अखिलेश लोधी, नीतिराज चौरे, ठाकुर जय श्री, नमन चौकसे, अनिल कुमार साकेत, आशीष कुमार गुप्ता, अजय कुमार शर्मा, पवन खरपूसे एवं सुखेंद्र साहू ने प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं का पाठ किया तथा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।अपने अध्यक्षीय संबोधन में मुख्य कारखाना प्रबंधक श्री प्रफुल्ल वी. कोहाडे ने कहा कि हिंदी केवल प्रशासन की भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की भाषा की सरलता और सहजता आज भी समाज को एक सूत्र में बांधने की प्रेरणा देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे साहित्यिक आयोजन रेलकर्मियों को राजभाषा हिंदी के प्रयोग एवं प्रसार के लिए प्रेरित करेंगे।उन्होंने कहा कि एक औद्योगिक संस्थान के रूप में कारखाने का सीधा संबंध श्रम और श्रमिकों से है। प्रेमचंद द्वारा प्रतिपादित ‘श्रम की प्रतिष्ठा’ का सिद्धांत ही कारखाने की कार्य संस्कृति का मूल आधार है। जब प्रत्येक कर्मचारी ईमानदारी, निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करता है, तभी प्रेमचंद के विचारों का वास्तविक अनुपालन होता है।इस अवसर पर उन्होंने सभी उपस्थितजनों को कार्यस्थल पर ईमानदारी, पारदर्शिता एवं श्रम के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखने का संकल्प दिलाया तथा साहित्यिक संगोष्ठी में भाग लेने वाले सभी रेलकर्मी साहित्यकारों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।कार्यक्रम का संचालन श्री अखिलेश लोधी एवं श्री राकेश कुमार मालवीय ने संयुक्त रूप से किया। अंत में संपर्क राजभाषा अधिकारी एवं सहायक कार्मिक अधिकारी श्री संदीप शर्मा ने मुख्य अतिथि, अधिकारीगण, साहित्यकारों, सांस्कृतिक अकादमी के कलाकारों तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
