IT कंपनियों ने हायरिंग बंद क्यों कर दी?क्या AI बड़ा कारण !

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आजकल आदमी की तुलना घोड़े से हो रही है। 100 साल पहले तक घोड़े सामान ढोते थे, घोड़ा गाड़ी या घोड़े से लोग यहाँ वहाँ जाते थे। फिर मोटर कार आईं। घोड़े अब किसी काम के नहीं रह गए। घोड़े अब शौक के लिए रखें जाते हैं। रेस में दौड़ते हैं जिस पर लोग सट्टा लगाते हैं। AI के संदर्भ में यही बात इंसानों के लिए कही जा रही है कि उनकी जगह मशीन काम करेगी। इस पर लिखने की वजह यह है कि भारत में 5 बड़ी IT कंपनियों ने इस वित्त वर्ष के नौ महीनों में सिर्फ 17 कर्मचारियों को जोड़ा है। पिछले साल इसी अवधि में यह आँकड़ा 17 हज़ार था।
भारत की पाँच बड़ी IT कंपनियाँ हैं- TCS, Infosys, Wipro, HCL और Tech महिंद्रा. इनमें क़रीब 15 लाख कर्मचारी हैं। इन कंपनियों को जैसे जैसे नया काम मिलता था वो कर्मचारियों को हायर करते थे। अच्छे साल में एक लाख कर्मचारियों तक को रखा जाता था। यह सिलसिला दो साल से थमने लगा और इस साल इन कंपनियों में हायरिंग जितनी हुई उतनी ही फ़ायरिंग। TOI के मुताबिक कुल जमा 17 कर्मचारी बढ़े हैं। मोटे तौर पर हायरिंग बंद है।TCS ने तो दिसंबर तक 25 हज़ार कर्मचारियों को निकाल दिया है।
हायरिंग बंद होने का सबसे बड़ा कारण है AI । कंपनियाँ AI की मदद से वर्तमान कर्मचारियों से ज़्यादा काम निकालने पर ज़ोर दे रही है। ये सिर्फ़ भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में हो रहा है। भारत के इंजीनियरों को अमेरिका में भी काम मिलता था। अब वहाँ की टेक्नोलॉजी कंपनियों की H1 B वीजा में रुचि कम हो रही है। इसी वीजा पर विदेशी अमेरिकी कंपनियों में काम करते हैं। इन कंपनियों का कहना है कि अब AI काम कर रहा है। Claude भी Gemini और ChatGPT की तरह AI Chat bot है । इसका Claude Code कोडिंग के लिए सबसे अच्छा माना जा रहा है। यही काम IT कंपनियों में इंजीनियर करते हैं।
Goldman Sachs की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि अमेरिकी कंपनियों में 25% काम AI करने लग जाएगा। इसी रिपोर्ट के बाद यह चर्चा चल पड़ी है कि इंसानों का हाल क्या घोड़े जैसा हो जाएगा? आपको क्या लगता है?
हिसाब किताब में अर्थव्यवस्था और कंपनियों के अलावा टेक्नोलॉजी को भी समझने समझाने की कोशिश है।

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