दो दिवसीय औषधीय पादपों पर राष्ट्रीय स्तर के क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का भव्य शुभारंभ
आरसीएफसी सेंटर भविष्य में पूरे देश में नई दिशा प्रदान करेगा- डॉ. महेश दधीच
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के पादप किया विज्ञान विभाग के तत्वाधान में कृषि महाविद्यालय, जबलपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल सभागार में दो दिवसीय औषधीय पादपों पर राष्ट्रीय स्तर की केता विक्रेता सम्मेलन का उद्घाटन डॉ. महेश कुमार दधीच, सीईओ, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के मुख्यआतिथ्य एवं अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. धीरेन्द्र खरे की अध्यक्षता में किया गया।

सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में वेटरनरी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मनदीप शर्मा, भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं मुख्यवक्ता डॉ. दिनेश कुलकर्णी, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय एग्रो इकोनॉमी सेंटर, नईदिल्ली, श्री प्रमोद चौधरी, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. जयंत भट्ट, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अमित शर्मा, डॉ. अखिलेश तिवारी, डॉ. ज्ञानेन्द्र तिवारी मंचासीन रहे। मुख्यअतिथि की आसंदी से डॉ. महेश कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन औषधीय पौधों के क्षेत्र में उभरते रुझानों पर मंथन और भविष्य की रणनीति विषय पर एक बेहरीन मंच है। आपने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से किसानों, उद्योगों, व्यापारियों, मार्केट और शोध संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, ताकि इस क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सके। आरसीएफसी सेंटर, मध्यक्षेत्र के उद्द्घाटन के अवसर पर डॉ महेश ने कहा कि यह केन्द्र मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में ही नहीं काम करेगा अपतुि भविष्य में पूरे देश में नई दिशा प्रदान करेगा।वेटरनरी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मनदीप शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे भारत देश में प्राचीन काल से ही औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों का चिकित्सीय पद्धतियों के इस्तेमाल में बेहतर उपयोग किया जाता रहा है। आपने लोगों को फिर से औषधीय पौधों के प्रति जागरूक होने और किसानों को इसकी खेती एवं बेहतर कृषि पद्धतियों तथा फसल कटाई के बाद की उन्नत कार्यप्रणालियों को विकसित करने पर जोर दिया।कार्यक्रम के मुख्यवक्ता एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री भकिस, डॉ. दिनेश कुलकर्णी अपने उद्बोधन में कहा कि किसानों को दृष्टिगत रखते हुए कृषि अनुसंधान हो, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा हो सके। आपने कहा कि उच्च गुणवत्तायुक्त किसानों को बीज मिले और प्रोसेसिंग के साथ बाजार की उपलब्धता निर्धारित हो, जिससे औधषीय खेती करने वाले कृषकों को चुनौतियों को सामना न करना पड़े। बैठक कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉ. धीरेन्द्र खरे ने कहा मेडिशनल प्लान्ट कोऔषधीय फसल के रूप में समझा जाए और इसकी गुणवत्ता मी बनी रहे। इसके लिए सही स्थान का चुना जाना आवश्यक है ही. ताकि ये फसले अधिक उत्पादित हो सके। इसके अलावा बीज के मानक बनाने पर जोर दिया जाए ताकि उच्व गुणवत्ता का बीज उपलब्ध हो सके। अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. जयंत भट्ट ने भी औषधीय पौधों की महत्ता पर प्रकाश डाला।डॉ. प्रमोद कुमार चौधरी ने किसानों को बीज उपलब्ध कराना, प्रत्यक्ष बाजार, आयुष योजनाओं और सतत प्रथाओं पर प्रकाश डाला। आपने कहा कि जबलपुर में बहुत बड़ा सेंटर बनने जा रहा है, जिसका श्रेय जनेकृवियि को जाता है। यहां का अनुसंधान कार्य देश-दुनिया में विख्यात है। एक बार फिर औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से लोगों को इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।डॉ. अखिलेश तिवारी ने स्वागत उद्बोधन एवं दो दिवसीय औषधीय पादपों पर राष्ट्रीय स्तर की कंता-विक्रेता बैठक की रूपरेखा पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेन्द्र तिवारी ने आरसीएफसी सेंटर के उद्देश्य पर प्रकाश डाला और कहा कि इस सेंटर के माध्यम से 1900 प्रशिक्षण प्रदान किए जा चुके हैं। इसके अलावा मेडिशनल प्लांट को लेकर किसानों को जागरूक एवं औषधीय पौधों की खेती से कम लागत में कैसे अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. इस दिशा में कार्य किया जा रहा है।कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अमित शर्मा द्वारा एवं आभार प्रदर्शन प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. सी. बी. शुक्ला द्वारा किया गया।इस अवसर पर अधिष्ठाता उद्यानिकी संकाय डॉ. स्वाती बारवे, संचालक प्रक्षेत्र डॉ. विजय यादव, कुलसचिव डॉ ए.के. जैन, उपलेखा नियंत्रक डॉ. अजय खरे, डॉ. बी. के. दीक्षित, डॉ. दीपक राठी, डॉ. नम्रता जैन सहित सभी विभाग के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, किसान, केता-विक्रेता सहित अन्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
