हमारी माता कही जाने वाली मृदा की देखभाल जरूरी -डॉ. ब्रजेश दीक्षित
जनेकृविवि में मनाया गया विश्व मृदा दिवस,स्वस्थ शहरों के लिये स्वस्थ मिट्टी थीम पर किया गया जागरूक
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ.प्रमोद कुमार मिश्रा की प्रेरणा से जबलपुर चेप्टर इंडियन सोसायटी ऑफ सॉइल साइंस एवं मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वाधान में विश्व मृदा दिवस “स्वस्थ शहरों के लिये स्वस्थ मिट्टी” थीम पर मनाया गया। कार्यक्रम में जबलपुर चेप्टर इंडियन सोसायटी ऑफ सॉइल साइंस के प्रेसिडेंट व आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजेश दीक्षित ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर अपने उद्बोधन में कहा कि मिट्टी की समुचित देखभाल के लिये उसका मापन, सतत् निगरानी और उचित प्रबंधन टिकाऊ खेती के लिये आवश्यक है। आप मृदा परीक्षण के पश्चात् मृदा की आवश्यकतानुसार खाद्य एवं उर्वरक मृदा को समुचित मात्रा में प्रदान करते हैं, तो मृदा का स्वास्थ्य निरंतर उत्तम रहेगा।

आपने जैविक खेती और बायो फर्टिलाइजर का उपयोग अधिक मात्रा में करने हेतु प्रेरित किया है, क्योंकि रासायनिक खाद के अधिक उपयोग से हमारी माता कही जाने वाली मृदा धीरे-धीरे मुर्दा होती जा रही है, इस ओर सभी को गहन, गंभीरता के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।मृदा वैज्ञानिक एवं इंडियन सोसायटी ऑफ सॉइल साइंस, नई दिल्ली के काउन्सलर डॉ. बी. एस. द्विवेदी ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर विश्व मृदा दिवस पर अपने विचार व्यक्त किये। आपने कहा कि शहर को स्वस्थ रखने हेतु मिट्टी के प्रति जागरूक होना और उसकी उचित देखभाल करना, प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हर नागरिक को अपने कर्त्तव्यों का बोध करते हुये, अपने शहर और अपने देश को स्वच्छ, शुद्ध और स्वस्थ रखने के लिये निरंतर प्रयास करने होंगे। जिससे मृदा स्वस्थ रहे और उस पर रहने वाले एवं सूक्ष्म जीव की संख्या उचित बनी रहे, साथ ही उचित मात्रा में पोषक तत्व मिलते रहे और पौधा स्वस्थ हो। पौधे के उत्पाद को उपयोग करने वाला भी स्वस्थ्य रहे।कार्यक्रम में मृदा वैज्ञानिक डॉ. अमित उपाध्याय ने स्वागत उद्बोधन एवं विश्व मृदा दिवस के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की और कहा कि हैल्दी स्वॉइल कैसे बनाएं और मिट्टी को टिकाऊ बनाने के लिये मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील होंने की आवश्यकता है। सूक्ष्मजीव मिट्टी में कम होते जा रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आ रही है। लिहाजा हम सभी की जिम्मेदारी बनती है, कि मिट्टी की गुणवत्ता बनाएं रखने हेतु इसके प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।गौरतलब है कि विश्व मृदा दिवस का कार्यकम दो सत्रों में आयोजित किया गया। जिसमें प्रथम सत्र में वक्ताओं और छात्र-छात्राओं द्वारा मिटटी को स्वस्थ रखने और जागरूक करने करने हेतु अपने-अपने विचार व्यक्त किये गये। द्वितीय सत्र में भी पोस्टर प्रदर्शनी सहित अन्य गतिविधियां आयोजित हुई।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन वैज्ञानिक डॉ. जी. एस. टैगोर द्वारा किया गया।इस अवसर पर डॉ. राकेश साहू, डॉ. फूलचंद अमूले, श्री धर्मेन्द्र विजयवर्गीय, श्री मधुकर, श्री राजकुमार काछी, श्रीमति संगीता, श्रीमति रचना सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रही।
