जनेकृविवि में टिकाऊ खेती विषय पर तृतीय बैंच का 8 दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ

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फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने हेतु खेती को टिकाऊ एवं पुनर्योजी पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता-डॉ. जी. के. कौतु

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ.प्रमोद कुमार मिश्रा की प्रेरणा से मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग और एक्शन फॉर सोशल एडवांसमेंट (आसा), भोपाल के संयुक्त तत्वाधान में टिकाऊ खेती विषय पर 22 से 29 अगस्त तक 8 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत् शुभारंभ संचालक अनुसंधान सेवायें डॉ. जी. के. कौतु के मुख्यआतिथ्य, विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रजेश कुमार दीक्षित की अध्यक्षता एवं श्री लखन पाटीदार कार्यकम प्रबंधक, आसा, भोपाल के विशिष्ट आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर मुख्यअतिथि की आसंदी से डॉ. जी.के. कौतु ने प्रशिक्षुओं को कपास, मक्का और धान की उत्पादकता को बढ़ाने पर जोर देते हुये कृषि को टिकाऊ एवं पुनर्योजी तकनीकों के संबंध में अपने विचार व्यक्त किये। आपने कहा कि कपास की खेती को टिकाऊ बनाने के लिये पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाना, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग कम से कम करना सहित जल का कुशल उपयोग एवं एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाना आवश्यक है, ताकि इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डॉ. बी.के. दीक्षित ने अध्यक्षीय उद्बोधन में अनपायनी (टिकाऊ) कृषि पुनर्योजी कृषि के संबंध में अपने विचार व्यक्त किये हैं। आपने आधुनिक खेती के दुष्परिभाव को देखते हुये जैविक एवं टिकाऊ खेती द्वारा प्रदत्त उत्पादों का व्यवसायीकरण करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।प्रशिक्षण समन्वयक व कृषि वैज्ञानिक डॉ. जी. एस. टैगोर ने स्वागत उद्बोधन और 8 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्येश्य एवं इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डाला।श्री लखन पाटीदार कार्यक्रम प्रबंधक आसा, भोपाल ने जनेकृविवि के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि खेती को टिकाऊ बनाने के लिये ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आज के समय की मूल आवश्यकता बन गई है। यहां पर आएं कई राज्यों के करीब 30 प्रशिक्षाणार्थी ट्रेनिंग में जो कुछ भी ज्ञान अर्जित करेंगे उसे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर किसानों के साथ जरूर साझा करेंगे।प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा संज्ञा प्यासी एवं आभार प्रदर्शन डॉ. बी.एस. द्विवेदी, प्रशिक्षण सह समन्वयक (वैज्ञानिक) द्वारा किया गया।प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र के अवसर पर डॉ. एच.के. राय, डॉ. ए.के. उपाध्याय, डॉ. अभिषेक शर्मा, डॉ. फूलचंद अमूले, डॉ. किरण पटेल डॉ. शैलू यादव, श्रीमति संगीता ठाकुर, श्री मधुकर, श्री विजय झारिया, श्री रविन्द्र कछावे, श्रीमति सोनिका वर्मा, श्री राजकुमार काछी, श्रीमति दीपा यादव सहित विभाग के समस्त अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस समूचे कार्यक्रम को आयोजित करने में मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आचार्य डॉ. ब्रजेश दीक्षित और डॉ. के.के. त्रिवेदी, आसा, भोपाल का विशेष योगदान है।

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