गाजरघास प्रबंधन हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा की प्रेरणा से कृषि विज्ञान केंद्र जबलपुर एवं खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में 20वें गाजरघास जागरूकता सप्ताह 2025 के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कृषि वैज्ञानिक एवं गाजरघास सप्ताह के आयोजन समन्वयक डॉ. पी.के. सिंह के मुख्यआतिथ्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में डॉ. पी. के. सिंह ने गाजरघास के हानिकारक प्रभावों एवं इसके वैज्ञानिक प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह खरपतवार न केवल कृषि उत्पादन बल्कि मानव स्वास्थ्य, पशुधन एवं पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। आपने कहा कि जन-जागरूकता और सहभागिता के माध्यम से ही इसके उन्मूलन को सफल बनाया जा सकता है। आपने ग्रामीण युवाओं के लिए उद्यमिता विकास पर बल देते हुए जायगोग्राम्मा कीट के सामूहिक संवर्धन और उपयोग के महत्व को रेखांकित किया। डॉ. अर्चना अनोखे, वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) ने ऑडियो-वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से गाजरघास के दुष्प्रभावों और इसके एकीकृत प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी। आपने बताया कि गाजरघास की रोकथाम में जैविक उपायों का विशेष महत्व है, जिनमें इसका प्रमुख प्राकृतिक शत्रु मैक्सिकन बीटल (जायगोग्राम्मा कीट) प्रभावी सिद्ध हुआ है।कृषि विज्ञान केंद्र, जबलपुर की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. रश्मि शुक्ला द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। डॉ. शुक्ला ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य जनसाधारण को गाजरघास के हानिकारक प्रभावों से अवगत कराना और इसके प्रबंधन के उपायों की जानकारी प्रदान करना था, ताकि समाज में इस आक्रामक खरपतवार के प्रति जनचेतना विकसित हो और सामूहिक प्रयासों से इसका उन्मूलन किया जा सके।कार्यक्रम में इस कीट के जीवंत नमूने प्रदर्शित किए गए। अभ्यर्थियों एवं कृषि विज्ञान केंद्र, जबलपुर के स्टाफ को मैक्सिकन बीटल प्रदान किए गए, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में, जहां गाजरघास का प्रकोप है, इन्हें छोड़ सकें। कृषि विज्ञान केंद्र, जबलपुर परिसर के आसपास के क्षेत्र में भी मैक्सिकन बीटल छोड़े गए। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया है कि वे गाजरघास के दुष्प्रभावों के बारे में समाज में व्यापक जागरूकता फैलाएंगे और इसके प्रबंधन में व्यक्तिगत तथा सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएंगे।कार्यक्रम का संचालन डॉ. डी. के. सिंह और आभार प्रदर्शन डॉ. ए. के. सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. अर्चना अनोखे, डॉ. जे. के. सोनी, डॉ. दीक्षा एम. जी., श्री एम. के. मीणा (एसीटीओ), वैज्ञानिक डॉ. डी. के. सिंह, डॉ. ए. के सिंह, डॉ. नीलू विश्वकर्मा, डॉ. अक्षता तोमर, डॉ. निहारिका शुक्ला, डॉ. ऋचा सिंह, डॉ. नितिन सिंघई, डॉ. पूजा चतुर्वेदी एवं कु.अंजना गुप्ता का सराहनीय योगदान रहा। इस आयोजन में लगभग 100 प्रतिभागियों, जिनमें अभ्यर्थी, इनपुट डीलर एवं किसान शामिल हुये।
