बड़ी खबर-सनातनी सुरक्षा
वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन.मिश्र के सहयोग से ‘धर्म न्यायालय’ की स्थापना होने जा रही
अब हिंदुओं को अपने धर्म पर निर्णय के लिए वर्तमान अदालतों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा
सनातन हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए बड़ी खबर!हिंदुओं के धर्म में बार-बार घुसने वाली अदालतों और सरकारों के व्यवहार को देखते हुए ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज हिंदुओं को रामजन्म भूमि दिलवाने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एन.मिश्र जी के सहयोग से ‘धर्म न्यायालय’ की स्थापना करने जा रहे हैं। मुंबई में शंकराचार्य जी के मंच से अधिवक्ता पी.एन.मिश्र जी ने कहा कि “हमारी वर्तमान न्याय व्यवस्था अंग्रेजों की बनाई हुई व्यवस्था पर आधारित है, जिससे न्याय प्रणाली धीरे-धीरे विखंडित और विकृत होती जा रही है। अब समय आ गया है कि हम वैदिक न्याय व्यवस्था के अनुरूप धर्म न्यायालय की स्थापना करें, जिसमें धर्म और संस्कृति की रक्षा के साथ न्याय भी समयबद्ध और सात्विक हो।” उन्होंने आगे कहा कि “धर्म न्यायालय धर्म, संस्कृति, गौ रक्षा, गोत्र, विवाह, परंपरा एवं अन्य धार्मिक विषयों पर शास्त्र सम्मत न्याय देगा।”इस पर शंकराचार्य जी ने पी.एन.मिश्र के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “मिश्र जी द्वारा वैदिक परंपरा के अनुरूप न्याय व्यवस्था का यह सुझाव निश्चित ही राष्ट्र को उसकी मूल आत्मा से जोड़ेगा।” बता दूं कि शीघ्र ही शंकराचार्य जी के मार्गदर्शन में और पी.एन.मिश्र जी के सुझाव पर सनातनियों के लिए धर्म न्यायालय की स्थापना होने जा रही है। हिंदू यहां अपने धर्म, संस्कृति, परंपरा संबंधी विवादों को लेकर पहुंचेंगे जिस पर निर्णय दिया जाएगा। निचली अदालत से सर्वोच्च अदालत क्रम में इस धर्म न्यायालय के सर्वोच्च पद पर हमारे शंकराचार्य जी रहेंगे। इस निर्णय को अदालत को भी मानना होगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का ऐसा एक निर्णय है, जो इस तरह के न्यायालय के गठन का मार्ग प्रशस्त करता है। अब हिंदुओं को अपने धर्म पर निर्णय के लिए वर्तमान अदालतों पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
