प्रधानमंत्री की मन की बात में गूंजी भारतीय परंपरा और जल संरक्षण की गूंज

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जबलपुर महापौर और अध्यक्ष की उपस्थिति में किसानों ने सुना 134वां एपिसोड

मन की बात कार्यक्रम के 134 वें एपिसोड में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किसानों और देशवासियों को संबोधित किया। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज के साथ क्षेत्र के अन्नदाताओं ने प्रधानमंत्री के प्रेरक विचारों को सुना। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, जल संरक्षण और जीव दया जैसे विषयों पर देश का मार्गदर्शन किया।*भारतीय परंपरा का संगम, देशी शीतल पेयजलों का लें खूब आनंद* भीषण गर्मी के इस मौसम में प्रधानमंत्री ने देश के कोने-कोने में सदियों से अपनाए जा रहे पारंपरिक और देशी शीतल पेयजलों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि ये पेय पदार्थ केवल प्यास नहीं बुझाते, बल्कि इनमें हमारी समृद्ध भारतीय परंपरा का संगम है। पीएम ने कहा कि आज पूरे विश्व में भारतीय आम की खुशबू फैली हुई है। उन्होंने आम, पना और आम के रस का विशेष जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने छांछ, लस्सी और बेल पना जैसी देसी विधाओं की विशेषताएं बतलाईं और लोगों से अपील की कि वे इस गर्मी में इन स्वास्थ्यवर्धक देसी पेयों का खूब आनंद लें।*सेवा के लिए अच्छे इरादे जरूरी, संसाधन नहीं* प्रधानमंत्री ने बहुजन हिताय बहुजन सुखाए के मूल मंत्र पर जोर देते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए बहुत बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इसके लिए केवल अच्छे इरादों की जरूरत होती है। उन्होंने देश में चल रहे विभिन्न सेवा कार्यों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारत की प्राचीन ताम्र पट्टिकाओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की तारीफ आज विश्व भर में हो रही है।*शिकायत नहीं, शुरुआत करें, जल स्रोतों के पुनरुद्धार की प्रेरक कहानी* नदी और जल संरक्षण पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की एक नदी के पुनरुद्धार की प्रेरक कहानी साझा की। उन्होंने कहा कि समस्याओं की शिकायत करने के बजाय शुरुआत करने का मंत्र अपनाकर वहां के लोगों ने एक मृतप्राय नदी को पुनर्जीवित कर दिया। हमें अपने आस-पास की नदियों, ताल-तलैयों, बावड़ियों और कुओं के संरक्षण की कहानियों से प्रेरणा लेनी होगी और जल संकट के खिलाफ एक जन-आंदोलन खड़ा करना होगा। *डॉल्फिन की घर वापसी और जीव दया* पर्यावरण और वन्यजीव संतुलन पर चर्चा करते हुए कार्यक्रम में संकट में फंसी डॉल्फिन को जीवन देकर पुनः उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित पहुंचाने की भावुक और प्रेरक कहानी भी सुनाई गई, जिसने उपस्थित सभी किसानों और नागरिकों को जीव दया के प्रति प्रेरित किया।*महापौर और अध्यक्ष ने जताया आभार, किसानों ने लिया संकल्प* कार्यक्रम के समापन पर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का यह संबोधन हमारे किसानों और नागरिकों के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है। देशी खान-पान को बढ़ावा देने और जल स्रोतों को बचाने का जो संदेश आज मिला है, उसे जबलपुर नगर निगम जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज ने उपस्थित किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का यह आयोजन हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की याद दिलाता है। कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने भी प्रधानमंत्री के शिकायत नहीं, शुरुआत के मंत्र को आत्मसात करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस अवसर पर किसान भाइयों के साथ एम आई सी सदस्य डॉ सुभाष तिवारी, विवेक राम सोनकर, दामोदर सोनी, श्रीमती अंशुल राघवेंद्र यादव श्रीमती रजनी कैलाश साहू आदि भी उपस्थित रहे।

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