विलुप्त हो रहे शुष्क क्षेत्रों के फलों के संरक्षण, संर्वधन एवं सुपोषण करने की महती आवश्यकता – डॉ. पी.के. मिश्रा

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जेएनकेव्हीव्ही में 30वीं अनुसंधान वैज्ञानिक समूह की वार्षिक बैठक का भव्य शुभारम्भ

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कृषि महाविद्यालय में स्थित विवेकानन्द सभागार में उद्यानिकी विभाग द्वारा आयोजित भाकृअनुप- अखिल भारतीय शुष्क क्षेत्र फल अनुसंधान परियोजना की 30वीं अनुसंधान वैज्ञानिक समूह की वार्षिक बैठक का भव्य शुभारम्भ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. पी.के. मिश्रा, कुलपति, ज.ने.कृ.वि.वि., जबलपुर, विशिष्ट अतिथि डॉ. वी.बी. पटेल, ए.डी.जी., उद्यानिकी, आई.सी.ए.आर., नई दिल्ली, डॉ. जगदीश राने, निदेशक, सीआईएएच, बीकानेर, राजस्थान, डॉ. जे.एस. मिश्रा, निदेशक, डीडब्लूआर, जबलपुर, डॉ. प्रकाश पाटेल, परियोजना समन्वयक, फल, आईआईएचआर, बैगलोर एवं सम्माननीय अतिथि डॉ. ए.के. जैन, संचालक अनुसंधान सेवाएँ, ज.ने.कृ.वि.वि., जबलपुर, डॉ. एस.के. शर्मा, पूर्व निदेशक, सीआईएएच, बीकानेर, राजस्थान, डॉ. टी.आर. शर्मा, संचालक विस्तार सेवाएँ, ज.ने.कृ.वि.वि., जबलपुर, डॉ. स्वाती बारचे, अधिष्ठाता उद्यानिकी संकाय, ज.ने.कृ. वि.वि., जबलपुर, डॉ. पी.सी. त्रिपाठी, प्रमुख वैज्ञानिक, उद्यान, भाकृअनुप, नई दिल्ली की उपस्थिति रही। तीन दिन चलने वाली वार्षिक बैठक के आयोजन सचिव डॉ. यू.के. चन्देरिआ एवं आयोजन सह-सचिव डॉ. भारती चौधरी है।मुख्यअतिथि की आसंदी से कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि विलुप्त होने की कगार में विभिन्न प्रकार के शुष्क क्षेत्रों के फलों के संरक्षण, संर्वधन एवं सुपोषण करने की महती जरूरत है। साथ ही इन फलों की उत्पादन एवं संर्वधन तकनीकियो को किसानों तक पहुंचाने हेतु प्रभावी प्रयास करने की आवश्यकता है।विशिष्ट अतिथि डॉ. वी.बी. पटेल, ए.डी.जी., उद्यानिकी, आई.सी.ए.आर., नई दिल्ली ने कहा कि शुष्क क्षेत्रों के फल पौष्टिक, औषधीय गुणयुक्त एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुऐ एक अच्छा विकल्प है। अतः इनके परिपेक्ष्य में चल रहे अनुसंधान कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि किसानों की आमदनी बढाने के बेहतर विकल्प मिल सकें।कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र के दौरान लगभग 10 तकनीकी सहित्यों का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। डॉ. जगदीश राने, निदेशक, सीआईएएच, बीकानेर को शुष्क क्षेत्र के लिए फलों पर विशेष अनुसंधान कार्यों के लिए मंचासीन अतिथियों द्वारा सॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान के इसी क्रम में श्री श्याम गटानी, महाराष्ट्र, डॉ. जुगल किशोर भूतडा, महाराष्ट्र एवं डॉ. विजय निमजे, महाराष्ट्र को भी सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. रीना नायर, सहायक प्राध्यापक एवं आभार प्रदर्शन प्रभारी अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. ज्ञानेन्द्र तिवारी द्वारा किया गया।इस अवसर पर निदेशक, तिल-रामतिल परियोजना डॉ. आनंद विश्वकर्मा, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अमित शर्मा, संचालक प्रक्षेत्र डॉ. विजय यादव, उपलेखा नियंत्रक डॉ. अजय खरे, निदेशक एबीएम डॉ. दीपक राठी, सूचना एवं जनसम्र्पक अधिकारी डॉ. बी.एस. द्विवेदी, डॉ. ब्रजेश दीक्षित, डॉ. नम्रता जैन, सहित प्रतिभागी, प्राध्यापक, वैज्ञानिक और विद्यार्थी बड़ी संख्या उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अखिलेश तिवारी, डॉ. बी.पी. बिसेन, डॉ. सी.एस. पाण्डे, डॉ. रजनी शर्मा, डॉ. रीना नायर, डॉ. राहुल डोंगरे, डॉ. मीनाक्षी रामगिरी, डॉ. आर.पी. जयसवाल, दीपक सिंह, अनिल चौहान, सुप्रिया गुप्ता, अमन तिवारी, कोमल, हिमांशु, सौरभ, शुभम एवं शोध विद्याथीयों का विशेष योगदान रहा।

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