समरसता सेवा संगठन के तत्वाधान में घुघरा जलप्रपात क्षेत्र में हुआ 1100 औषधिय पौधों का रोपण

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प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी : मंत्री राकेश सिंह

चार भागों में विकसित हो रही समरसता भृगु औषधि वाटिका

प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य को प्रकृति से सब कुछ प्राप्त होता है। ऐसे में हमारा भी दायित्व है कि हम प्रकृति को कुछ लौटाएं और यदि ऐसा नहीं कर सकते, तो कम से कम अपने कार्यों से प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं। यह बात प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने घुघरा जलप्रपात, लम्हेटा घाट क्षेत्र में समरसता सेवा संगठन के तत्वावधान में आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर समरसता भृगु औषधि वाटिका में विधायक श्री नीरज सिंह, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नू, ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्री राजकुमार पटेल, महानगर जिला अध्यक्ष श्री रत्नेश सोनकर, विधायक श्री सुशील तिवारी ‘इंदु’, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री अखिलेश जैन, समरसता सेवा संगठन के संस्थापक अध्यक्ष एवं जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संदीप जैन, नगर निगम अध्यक्ष श्री रिंकू विज, उपाध्यक्ष श्री प्रशांत केसरवानी, भेड़ाघाट नगर परिषद अध्यक्ष श्री चतुर सिंह लोधी तथा उपाध्यक्ष श्री जगदीश दाहिया की उपस्थिति में 1100 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सर्व समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति, संस्था अथवा सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। प्रकृति हमें जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करती है। जल, वायु, वनस्पति और प्राकृतिक संपदा के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति के संरक्षण का भाव हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।उन्होंने समरसता सेवा संगठन एवं कार्यक्रम के संयोजक श्री संदीप जैन की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने इस क्षेत्र को औषधि वाटिका के रूप में विकसित करने का जो कार्य प्रारंभ किया है, वह सराहनीय है। पौधारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनका संरक्षण, नियमित देखभाल और उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा के प्रति यहां उपस्थित सभी लोगों और जबलपुर के नागरिकों की गहरी आस्था एवं श्रद्धा है। मां नर्मदा के प्रति हमारे भाव हमें प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण की प्रेरणा देते हैं। नर्मदा तट और उसके आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों को स्वच्छ, हरित और संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है।

तीन वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहा संगठन
समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री पवन पांडे ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा विगत तीन वर्षों से प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लगातार पौधारोपण किया जा रहा है। यह प्रसन्नता का विषय है कि सर्व समाज की सहभागिता से पूर्व में रोपे गए पौधे अब वृक्ष का रूप लेने लगे हैं। लगाए गए पौधों की सफलता दर लगभग 90 प्रतिशत होना संगठन के सतत प्रयासों, पौधों की देखभाल और सामाजिक सहभागिता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल पौधारोपण करना नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षण के साथ समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। पौधों को रोपित करने के बाद उनकी नियमित देखभाल की जाती है, जिससे वे सुरक्षित रूप से विकसित होकर आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण प्रदान कर सकें।

औषधीय एवं धार्मिक महत्व की वनस्पतियों से विकसित हो रही वाटिका

समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष श्री पवन पांडे ने बताया कि मां नर्मदा के तट के समीप विकसित की जा रही समरसता भृगु औषधि वाटिका को अशोक वाटिका, लता वाटिका, नवग्रह वाटिका और दशमूल वाटिका—चार भागों में विभाजित किया गया है। इन वाटिकाओं में विभिन्न औषधीय, धार्मिक एवं पर्यावरणीय महत्व के पौधों का रोपण किया जा रहा है।

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