किसानों की फसलों की जानकारियां एकत्रित करने हेतु सॉफ्टवेयर कारगर सिद्ध होगा- कुलपति डॉ. पी.के. मिश्रा
जनेकृविवि में फसलों की लागत का अध्ययन करने हेतु फार्मएप 3.0 ट्रेनिग प्रोग्राम
जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा के मुख्यआतिथ्य एवं अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. अल्पना सिंह की अध्यक्षता में मुख्य फसलों की खेती की लागत का अध्ययन करने लिए व्यापक योजना एवं फार्मएप 3.0 विषय पर एक दिवसीय ट्रेनिग प्रोग्राम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि कुलपति डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि यह लेटेस्ट सॉफ्टवेयर किसानों की फसलों की सभी तरह की जानकारियां एकत्रित करने हेतु कारगर सिद्ध होगा।

आपने भारत सरकार की 1971 से शुरू हुई इस परियोजना को लेकर पूर्व में एवं वर्तमान में हुए विभिन्न परिवर्तनों हेतु अपने अनुभव और महत्वपूर्ण सुझाव एवं जानकारियों को प्रशिक्षार्थियों के बीच साझा किया।अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय, जबलपुर डॉ. अल्पना सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यह प्रशिक्षण बहुत की महत्वपूर्ण है, इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से फसलों की सटीक एवं विश्वसनीय जानकारियां एकत्रित करने में प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारियों के लिए लाभप्रद होगा।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. अखिलेश तिवारी ने भी कहा कि इस कार्य हेतु भविष्य में कुछ उद्यानिकी फसलों को भी इसमें सम्मिलित किया जाए, जिससे किसानों को उसका उचित मूल्य प्राप्त हो सके।कृषि अर्थशास्त्र एवं प्रक्षेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक राठी ने कायकम में स्वागत उद्बोधन एवं महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। साथ ही आपने कहा कि कृषकों की सभी तरह की जानकारियां, उत्पादन से लेकर उसके विपणन तक पशुधन आदि का एकत्रीकरण करने हेतु इस लेटेस्ट सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है।डॉ. गौरव कुमार वाणी ने प्रशिक्षण कार्यकम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला और कहा कि इस परियोजना से 540 किसान जुड़ चुके हैं, इसमें 15 से बढ़कर अब 18 फसलों का डेटा एकत्रित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में कैसे डेटा को भरना है, जिससें डेटा का त्वरित रूप से स्थानांतरण संबंधित एजेंसी को किया जा सके ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारियों को प्रदान की जा रही है।गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रोशनी तिवारी एवं आभार प्रदर्शन डॉ. गौरव वाणी द्वारा कियाइस अवसर पर डॉ. आदित्य नारायण गौतम, डॉ. गुलाब शंकर पाठक, डॉ. मानस गुप्ता, वैज्ञानिक, कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश के 45 जिलों के प्रक्षेत्र निरीक्षक, प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी, सुपरवाइजर आदि शामिल हुए हैं।
