‘संस्कारधानी समरसता कजलियां महोत्सव’,सामाजिक सहिष्णुता और समरसता के नाम
17 अगस्त सावन सोमवार को पात्र वितरण, 29 अगस्त को हनुमानताल में विराट आयोजन
समरसता जैसे प्रमुख मानवीय और सामाजिक मूल्य की पहचान बन कर उभरे ‘समरसता सेवा संगठन’ द्वारा चाौथे वर्ष भी संस्कारधानी जबलपुर में पूज्य संतों के सानिध्य में कजलियां महोत्सव का आयोजन आगामी 29 अगस्त को अपरान्ह 2 बजे से हनुमानताल सरोवर में किया जा रहा है।
सर्वविदित है कि सनातन परम्परा एवं भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना महत्व है। इसी श्रृंखला में सामाजिक समरसता एवं आपसी संबंधों की प्रगाढ़ता में कजलियां पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। महाकोशल, बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, पूर्वांचल, छत्तीसगढ़ सहित लगभग सम्पूर्ण मध्यभारत में कजलियां पर्व आपसी सद्भाव के लिये जाना जाता हैं । समरसता सेवा संगठन के कजलियां मिलन महोत्सव की विराटता को देखते हुए 12 दिन तक विविध विषयों की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। समारोह का श्रीगणेश सावन माह के तृतीय सोमवार 17 अगस्त को आद्य शंकराचार्य चौक स्थित समन्वय सेवा केन्द्र में भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक और कजलियां पात्र वितरण से होने जा रहा है। तदाशय की जानकारी समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष पवन पांडे, सचिव मनोज सेठ
ने पत्रकार वार्ता में दी। इस अवसर पर पं रोहित दुबे, महाकौशल चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री रवि गुप्ता, अग्रवाल सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री कैलाश अग्रवाल बब्बा, श्री सुरेश सराफ, पूर्व सचिव उज्जवल पचौरी उपस्थित थे।
अनेक संगठनों की सहभागिता –
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि समरसता के प्रतीक पर्व ‘‘कजलियां’’ को समरसता सेवा संगठन ने सर्व समाज की सहभागिता से पुनः संस्कारधानी के प्राचीन ऐतिहासिक स्वरूप में लाने का प्रयास किया है। इसके लिए विगत तीन वर्षों से लगातार कजलियां महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसके साक्षी सभी संस्कारधानी वासी रहे हैं। इस बार पुनः समरसता सेवा संगठन इस महा महोत्सव को भव्यतम स्वरूप देने की दिशा में प्राणप्रण से तैयारियां कर रहा है। बीते वर्षों के कजलियां महोत्सव में संस्कारधानी के 42 सामाजिक संगठनों की सहभागिता थी। इस बार आयोजन को लेकर सर्वसमाज के उत्साह को देखते हुए आशा है कि पिछले वर्षों की अपेक्षा और अधिक सामाजिक संगठनों की सहभागिता आयोजन में होगी। इसके अलावा कई व्यापारिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक संस्थाओं की सहभागिता भी रहेगी। आयोजन में शामिल होने वाले सभी जाति समाजों और संगठनों के प्रतिनिधियों को सावन मास के तृतीय सोमवार 17 अगस्त (नागपंचमी) के दिन आयोजित कजलियां पात्र वितरण कार्यक्रम में वितरित पात्र में बोई गईं कजलियां लेकर उपस्थित होंगे। जिनकी पूजन के उपरांत सभी एक दूसरे को कजलियों का आदान-प्रदान कर शुभकामनाएं प्रेषित करेंगे।
- गूंजेगी कजरी, आल्हा, लोकगीतों की स्वर लहरियां
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि कजलियां महोत्सव में पिछली बार की तरह इस बार भी कजरी, आल्हा, लोकगीत, बुंदेली गीत, सुगम गायन सहित पारंपरिक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति दी जाएगी। इसके लिए बुंदेलखंड, बघेलखंड के प्रतिष्ठित लोकशैली के गायकों को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके साथ ही स्थानीय कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। आयोजन में बच्चों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें सांस्कृतिक – शैक्षणिक प्रतियोगिताएं शामिल रहेंगी, जिनके माध्यम से आने वाली पीढ़ी को सनातन परम्परा, भारतीय संस्कृति और समरसता के प्रतीक पर्व से अवगत कराया जा सकें। विविध प्रतियोगिताओं में सम्मलित प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। समरसता कजलियां महोत्सव के मंच पर संस्कारधानी के पूज्य संत गण विराजमान रहेंगे, जो सभी उपस्थित जनों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। हनुमानताल में कजलियां पर मेला लगने की परंपरा रही है, इसलिए इस बार भी समारोह को भव्यता प्रदान करने मेले का स्वरूप दिया जायेगा। महिलाअों के लिए आकर्षक झूले और चाइल्ड जोन में बच्चों के मनोरंजन की व्यवस्था के प्रयास किए जाएंगे। वहीं सभी समाजों के सहयोग से पारंपरिक व्यंजनों का जायका भी आगंतुकों के लिए उपलब्ध रहेगा।
तीन वर्षों में ही जन-जन का हुआ संगठन–
संगठन अध्यक्ष पवन पांडे ने बताया कि समरसता सेवा संगठन की आधार शिला संस्थापक अध्यक्ष संदीप जैन जी ने जिस उद्देश्य के तहत रखी थी, उन उद्देश्यों को सभी का आशीर्वाद मिल रहा है, और तीन वर्षों में ही समरसता सेवा संगठन जन-जन का संगठन और हर जुबां की आवाज़ बन गया है। श्री पांडे ने बताया कि समरसता सेवा संगठन ने बीते तीन वर्ष में 150 से अधिक आयोजन किए हैं। इनमें सभी महापुरुषों की जयंती पर उनके विचारों के प्रसार के लिए विचार संगोष्ठी का आयोजन, हजारों प्रबुद्धजनों और विभूतियों का सम्मान, प्रकृति सेवा के तहत पौधारोपण, संस्कृति प्रवाह के तहत रंगपंचमी पर समरंग यात्रा, कजलियां महोत्सव, श्रीरामभद्राचार्य जी के मुखारविन्द से श्रीराम कथा सहित कई आयोजन हर वर्ग द्वारा सराहे गए हैं। संगठन के उद्देश्य सब सबको जाने, सब सबको मानें के ध्येय वाक्य को आत्मसात करते हुए समरसता के विविध आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं में रहे हैं। इस वर्ष के कैलेंडर में सबके सहयोग और सुझाव के अनुरूप कई नए आयोजनों को शामिल किया गया है।
सभी का मिला आशीर्वाद-
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि समरसता के पवित्र विचार के प्रसार में पूज्य संतों सहित हर समाज के विचारवान लोगों का आशीर्वाद समरसता सेवा संगठन को मिला है। संगठन का श्रीगणेश तुलसीपीठाधीश्वर स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी के आशीर्वाद और आशीर्वचन के साथ हुआ था। तब से अब तक अनेक संत-महात्माओं का सानिध्य संगठन को मिल चुका है। संगठन की विचार यात्रा को आगे बढ़ाते हुए इस बार प्रकृति सेवा के साथ गुरु पूर्णिमा पर संत पूजन और मानव सेवा को भी सेवा प्रकल्प में शामिल किया गया है। पदाधिकारियों ने बताया कि भारतीय त्यौहार सामाजिक सहिष्णुता और समरसता के प्रतीक हैं। इन पर्वों के आयोजन पर सभी जाति, वर्ग और समाज के लोग आपस में जुड़कर आपसी एकता का संचार करते हैं।
कजलियां महापर्व भी इसी परंपरा से ओतप्रोत है, जिसमें समन्वय, सद्भाव व समरसता की सामाजिक खुशबू है। ये खुशबू हमारे मन-बुद्धि में फैलकर वृहद रूप से राष्ट्रीय एकता की माला बन कर भारत माता के गले का मंगलाहार बनती है। इसी उद्देश्य के साथ समरसता सेवा संगठन ने कजलियां के आयोजन की संयोजना की है। इस भव्य-दिव्य एवं गरिमामय समारोह की संयोजना में सभी पूज्य संतों एवं प्रबुद्धजनों का आशीर्वाद और सहयोग आयोजन को सार्थकता प्रदान करेगा।
