आपरेशन सिंदूर के बाद कुलगाम कांड कैसे?
पूरा देश जहाँ गाली-गलौच में उलझा हुआ है इसी बीच ठीक सवा साल बाद जम्मू कश्मीर के कुलगाम में पहलगाम पेटर्न से दो मजदरों को उनकी जाति पूछकर मौत के घाट उतार दिया गया.दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम ज़िले में शुक्रवार शाम संदिग्ध चरमपंथियों की ओर से की गई गोलीबारी में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मज़दूरों की मौत हो गई. आपरेशन सिंदूर के 14 महीने बाद हुई ये नृशंस वारदात कथित रुप से नेस्तनाबूत किए जा चुके आतंकवाद का एक ट्रेलर है और सोमवार को देश एक बार फि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इन हत्याओं को लेकर सवाल करेगा. जंतर -मंतर पर छात्रों, युवाओ पर पैलेटगन चलाने की जिम्मेदारी लेने से बचते फिर रहे आब क्या करेंगे?मारे गए दोनों मज़दूर केलम इलाक़े में एक ईंट-भट्ठे पर काम करते थे. मृतकों की पहचान दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना के रूप में हुई है.पुलिस केअनुसार, दीपक की मौत घटनास्थल पर ही हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया.वहां से उन्हें श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ रेफ़र किया गया, जहां शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई.आमतौर पर जैसा होता है कि घटना के बाद हमलावर अंधेरे का फ़ायदा उठाकर मौके से फ़रार हो गए. सुरक्षाबलों ने पूरे इलाक़े की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है.ये वारदात पहलगाम कांड के जख्मों को कुरेदने वाली है.जम्मू-कश्मीर पुलिस को जैसे काठ मार गया है. पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है और न ही किसी आतंकी दल ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है.गोलीबारी की घटना के बाद प्रधानमंत्री की ही तरह जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रेस से सीधी बात करने के बजाय सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत की है.उपराज्यपाल ने अपने पोस्ट में कहा, “मैंने हमारे सुरक्षा बलों को अपने ऑपरेशन तेज़ करने और आतंकवादियों को ख़त्म करने का निर्देश दिया है.”आपको याद होगा कि बीते साल 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे. इस हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई करते हुए 7 मई 2025 ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था जो तीन दिन बाद ही सीजफायर में बदल गया था. तब आज के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि भविष्य में यदि पहलगाम कांड की पुनरावृति हुई तो उसे भारत के खिलाफ युद्ध की ही कार्रवाई माना जाएगा.मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तो कुलगाम में दो मजदूरों की कायराना हत्या की कड़ी निंदा की है लेकिन केंद्र सरकार अभी मौन बैठी है. लगता है कि अब सोमवार को एक बार फिर इस मुद्दे पर संसद में फिर हंगामा हो और सरकार फिर संसद से भाग खडी हो.
पत्रकार -राकेश अचल
