बिना डीएड-बीएड के अतिथि शिक्षक नियुक्ति डिंडोरी डिंडोरी जिले के जनपद शिक्षा केंद्र समनापुर अंतर्गत संचालित अंग्रेजी माध्यम कन्या आश्रम शाला समनापुर

जिला डिंडोरी खेमचरन वर्मे की रिपोर्ट 8103275220 शिक्षा की कहानी: योग्य युवकों का दर्द, बिना डीएड-बीएड के अतिथि शिक्षक नियुक्ति*डिंडोरी। डिंडोरी जिले के जनपद शिक्षा केंद्र समनापुर अंतर्गत संचालित अंग्रेजी माध्यम कन्या आश्रम शाला समनापुर, इन दिनों विवादों के घेरे में है। आरोप है कि यहां अतिथि शिक्षक की नियुक्ति में नियमों को ताक पर रखकर, बिना डीएड-बीएड जैसे अनिवार्य प्रशिक्षण के, गीतांजलि राजपूत नाम की युवती की नियुक्ति कर दी गई। जबकि इनका अभी विंध्य कॉलेज कल्याणपुर शहडोल से डीएड चल रहा है इनका डीएड सेकंड ईयर है अभी अभी इनका डीएड कंप्लीट नहीं हुआ। इनका अभी सिर्फ डीएड फर्स्ट ईयर कंप्लीट है बस, ओर इतना ही नहीं ग्रेजुएशन में भी इनका कोई ज्यादा नंबर नहीं है इनका डीएड अभी कंप्लीट नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि नियुक्ति इतनी “चुप्पी साधे” तरीके से की गई कि अन्य पात्र अभ्यर्थियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब तक युवाओं को जानकारी हुई, तब तक “तीर कमान से निकल चुका था।” योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी, सवालों के घेरे में विभाग स्थानीय युवाओं का आरोप है कि जब जिले में डीएड-बीएड प्रशिक्षित युवा बेरोजगार बैठे हैं, तब अप्रशिक्षित व्यक्ति को अतिथि शिक्षक बनाना “आंखों में धूल झोंकने” जैसा है। योग्य उम्मीदवारों युवकों का कहना है कि उनके माता-पिता ने मेहनत-मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया-लिखाया, इस उम्मीद में कि उन्हें योग्यतानुसार नौकरी मिलेगी। लेकिन यहां तो “जिसकी लाठी, उसकी भैंस” वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार युवती के पिता पहले समनापुर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पद पर थे अब रिटायरमेंट हो चुके है जिसके बजाय से स्कूल प्राचार्य और समनापुर बी ई ओ के साथ पहले से ही अच्छी जांपहचान थी। जिसके बजाय से उस नियुक्ति का बाकी योग्य अभ्यार्थियों को पता भी नहीं चला और नियुक्ति कर दी गई।अंग्रेजी माध्यम कन्या आश्रम शाला, जो बीईओ कार्यालय से महज दस कदम की दूरी पर है, वहां इस तरह की नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शिक्षा जैसे जिम्मेदार विभाग में नियमों की अनदेखी की जा सकती है?क्या प्रशिक्षित युवाओं को दरकिनार कर अप्रशिक्षितों को मौका देना न्यायसंगत है? क्या रिश्तेदारी और पहचान के आगे योग्यता “दम तोड़ देगी”?*‘खबर छपी, मगर जांच ठंडी बस्ते में’*आरोप है कि मामला समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बावजूद अब तक न तो कोई जांच शुरू हुई है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई हुई है। इससे युवाओं में निराशा है। उनका कहना है कि उनकी शिकायतों पर “कान में जूं तक नहीं रेंग रही”। कुछ अभ्यर्थियों का दावा है कि जब वे बीईओ कार्यालय पहुंचे तो उन्हें गोलमोल जवाब देकर टाल दिया गया। ऐसे में वे खुद को “अंधेरे में रखा गया” महसूस कर रहे हैं। *मीडिया से लगाई न्याय की गुहार*पीड़ित युवकों ने मीडिया के माध्यम से न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द जांच नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाएंगे।*उनका सीधा सवाल है—*“जब प्रशिक्षित युवा दर-दर भटक रहे हैं, तो बिना योग्यता के नियुक्ति क्यों?”पूरा मामला अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिका है। योग्य उम्मीदवार न्याय की उम्मीद में हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति “हाथ मलते रहने” जैसी है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस मामले में पारदर्शिता दिखाता है या फिर यह मुद्दा भी “ढाक के तीन पात” बनकर रह जाएगा।
