श्री राम जन्म जग मंगल हेतु के माध्यम से गूंजेगी समरसता की मंत्र ध्वनि
पद्म विभूषण, तुलसी पीठाधीश्वर, जगद् गुरु श्री रामानंदाचार्य, स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज करेंगे श्रीरामकथा की रसवर्षा
अवधपुरी (आयुर्वेदिक कॉलेज) परिसर में 05 अप्रैल से 09 दिवसीय भव्य-दिव्य आयोजन
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के समरस एवं समर्थ भारत की पावन संकल्पना को ध्येय मान कर वैचारिक तपस्या कर रहे विश्व वंदित तुलसी पीठाधीश्वर चित्रकूट के पद्मविभूषण, जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज आगामी 05 मार्च से 13 मार्च तक अवधपुरी (आयुर्वेदिक कॉलेज) परिसर गौरीघाट में श्रीराम कथा की रस वर्षा से संस्कारधानी वासियों को अभिसिंचित करेंगे। महाराजश्री की तत्वमयी कथा का विषय ‘राम जनम जग मंगल हेतु‘ होगा । ये संयोग ही है कि यह दिव्य संदेशवाहक पावन श्रीराम कथा उस ‘समरसता सेवा संगठन’ के तृतीय वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है, जिसकी आधारशिला स्वयं पूज्य महाराजश्री द्वारा तीन वर्ष पूर्व 13 अप्रैल 2023 को रखी गई थी । कथा के समापन दिवस पर 13 अप्रैल को समरसता सेवा संगठन का वार्षिकोत्सव भी महाराजश्री की संन्निधि में मनाया जाएगा उक्ताशय की जानकारी अवधपुरी नाम से सुसज्जित विशाल कथा पंडाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयोजक समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने पत्रकारों को दी। पत्रकार वार्ता में श्री जैन ने कथा की दिव्यता-भव्यता और उसके सामाजिक उद्देश्यों की जानकारी देने के साथ ही समरसता सेवा संगठन के तीन तीन वर्षीय समयावधि की विकास यात्रा की भी चर्चा की । श्री जैन ने बताया कि किस तरह पूज्य महाराजश्री की दिशा दर्शना के तहत समरसता सेवा संगठन इन तीन वर्षों में समरसता की अलख जगाते हुए प्रकृति सेवा, विचार सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ा है।पत्रकार वार्ता में समाजसेवी उद्योगपति श्री कैलाश गुप्ता, स्वागत समिति अध्यक्ष श्री गुलशन माखीजा, आयोजन समिति सचिव श्री अखिल मिश्रा, पं रोहित दुबे उपस्थित थे।श्रीराम सबके सब श्रीराम के –
श्री जैन ने कहा कि हम अपने वेदांत दर्शन सहित संतों के श्रीमुख से सदैव सुनते आए हैं कि प्रभु श्रीराम सबके हैं, और सभी श्रीराम के हैं। वस्तुतः यही भारतीय मनीषा का मुख्य सिद्धांत भी है । इस विचार और सिद्धांत का साकार स्वरूप अवधपुरी कथा पंडाल में देखने मिलेगा।उन्होंने बताया कि सभी वर्ग-समाज और जातियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति बतौर ‘यजमान’ कथा पंडाल में रहेगी । अब तक 35 से अधिक समाजों के प्रतिनिधि बतौर यजमान श्रीराम कथा में स्वमेव शामिल होने की जानकारी प्राप्त है । सभी समाजों के मानव पुष्प एक साथ मिलकर ‘समरसता’ की अलख जगाते हुए ‘सामाजिक गुलदस्ते’ के रूप में प्रभु श्रीराम के नाम से अनुगूंजित मंच के सामने होंगे।श्री जैन ने बताया कि ‘समरसता’ का यही स्वरूप समरसता सेवा संगठन का उद्देश्य भी रहा है । मां नर्मदा की कृपा से संकल्पित हमारा अभियान यदि मौजूदा स्वरूप में नजर आ रहा है, तो इसमें मां रेवा की कृपा, प्रभु श्रीराम का समरसता दर्शन और सबका उसमें शामिल होकर समर्पित हो जाना ही है।
शब्द के साथ नाट्य प्रस्तुति से संदेश –
प्रभु श्रीराम की यह कथा शब्दब्रम्ह के माध्यम से जहां कानों में समरसता का रस घोलेगी तो वहीं आंखों में नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से समरस संसार का दार्शनिक पक्ष भी सृजित करेगी । कथा मंच पर नाट्य लोक सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था की प्रस्तुतियों के माध्यम से समरसता का सजीव पक्ष प्रस्तुत होगा।श्री जैन ने बताया कि 09 दिन की कथा में अलग-अलग दिनों में कथा पूर्व 10 से 15 मिनट की अलग-अलग विषयों पर नाट्य प्रस्तुति होगी । सभी प्रस्तुतियों का लक्ष्य धर्म-संस्कृति के बिंदुओं को छूते हुए समरसता का प्रवाह ही होगा। श्री जैन ने बताया कि मंच पर ‘भक्तिमति शबरी, रानी दुर्गावती, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध एवं स्वदेशी, नागरिक कर्त्तव्य, शंकर शाह रघुनाथ शाह’ जैसे शीर्षकों के आधार पर नाट्य प्रस्तुतियां तैयार की गई है । इन प्रस्तुतियों के माध्यम से संस्कारधानी की पावन धरती से संगठन के उद्देश्य का व्यापक और वृहद प्रसार-प्रचार होगा।
महाराजश्री के वचन ईश्वरीय वचन –
श्री जैन ने बताया कि संगठन की आधारशिला रखते हुए महाराजश्री ने कहा था कि समरसता का मंत्र समाज में फैली विरसता की दुर्गंध को मिटाते हुए समरसता की सुगंध फैलाता है । समरसता सेवा संगठन का उद्देश्य मंत्र की तरह पवित्र होना चाहिए।श्री जैन ने बताया कि महाराजश्री ने कहा था कि समरसता के मंत्र से ही हमारा देश अखंड भारत, समरस भारत, समर्थ भारत बन सकता है । और इसी भाव के साथ “सब सबको जानें – सब सबको मानें” के मूल मंत्र को अपना ध्येय मानते हुये संगठन ने अपना कर्मपथ बनाया । विचार गोष्ठियों, पर्वों-उत्सवों, प्रकृति सेवा के माध्यम से हमने सबके सहयोग-समर्पण के आधार पर समरसता की रोशनी जन-जन ने अनुभूत की, जिसका परिणाम समरसता सेवा संगठन का मौजूदा स्वरूप है।
समरस विचार को समर्पित कथा –
श्री जैन ने कहा कि ‘सब सबको जानें-सब सबको मानें’ के ध्येय वाक्य के साथ प्रारंभ हुये ‘समरसता सेवा संगठन’ की कार्ययोजना के प्रारंभ अवसर पर 13 अप्रैल 2023 को परम पूज्य जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी ने ‘श्रीराम का समरस एवं समर्थ भारत’ विषय के माध्यम से अपने आर्शीवचन मे कहा था कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जीवन विश्व को मानवता की संजीवनी देता है। कार्ययोजना प्रारंभ होने के बाद इन 03 वर्षों में समाज के सभी वर्गो के ‘सब सबको जानें – सब सबको मानें’ के मंत्र को मान्यता देते हुये संस्कारधानी मे समरसता के भाव को प्रगाढ़ किया है और अब संगठन के 03 वर्ष पूर्ण होने पर मॉ नर्मदा के पावन तट पर पुन: परम पूज्य जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी के श्रीमुख से ‘श्रीराम जनम जग मंगल हेतु’ विषय पर 09 दिन तक आर्शीवचन प्राप्त होंगे।
शोभायात्रा के साथ नर्मदा कलश पूजन –
श्री जैन ने बताया कि कथा प्रारंभ होने के पूर्व जीवन दायिनी मां नर्मदा जी का अभिषेक एवं पूजन किया जावेगा । तत्पश्चात शोभायात्रा के साथ पूज्य गुरूदेव कथा स्थल पर प्रवेश करेंगे । शोभायात्रा 05 अप्रैल (रविवार) को ही नर्मदा पूजन के उपरांत गौरीघाट से अपरान्ह 3:00 बजे प्रारंभ होगी। शोभायात्रा में भगवान की दिव्य मनोहारी झांकियों, संकीर्तन करती कीर्तन मंडिलियों, संत-महात्माओं, मातृशक्तियों सहित सभी ईश्वरानुरागियों की उपस्थिति रहेगी । प्रभु श्रीराम का गुणगान करती हुई शोभायात्रा अवधपुरी स्थित कथास्थल तक पहुंचेगी, जहां नर्मदा कलश की विधिवत स्थापना की जाएगी । इसके उपरांत व्यास पूजन के साथ ही महाराजश्री कथा का मंगलाचरण करेंगे।
कथा को लेकर सर्वत्र उत्साह –
श्री जैन ने बताया कि श्रीरामकथा को लेकर न सिर्फ संस्कारधानी अपितु आसपास के जिलों में जबरदस्त उत्साह है । इस वैचारिक कथा की चर्चा चूंकि देश-दुनिया में फैले महाराज श्री के शिष्यों-अनुरागियों तक है, इस कारण सभी लोग इस कथा के श्रवण को लेकर उत्सुक हैं । सबके मनोभाव और उत्साह बता रहे हैं कि संस्कारधानी में हो रही इस कथा की किस स्तर पर प्रतीक्षा हो रही है । शहर सहित आसपास के ग्राम्यांचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन सम्मलित होंगे।
सेवाधारियों ने सम्हाली कमान –
इस श्रीराम कथा के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की कमान पूज्य संतो के आर्शीवाद एवं मार्गदर्शन मे जनप्रतिनिधियों के संरक्षण मे बनी स्वागत समिति के संयोजक श्री गुलशन माखीजा, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र जामदार, सचिव श्री अखिल मिश्रा के साथ समरसता सेवा संगठन के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं के साथ ही शहर के सभी वर्गों के लोगों ने संभाल ली हैं । उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं निगम प्रशासन भी अपने स्तर पर कथा की व्यवस्थाओं हेतु सतत सहयोग कर रहा है।श्री जैन ने आशा जताई कि इस कथा से समाज में समरसता का भाव और प्रगाढ़ होगा। समरसता सेवा संगठन ने सभी संस्कारधानी वासियों से आग्रह किया है कि वे नित्य प्रति प्रभु श्रीराम की कथा का श्रवण लाभ लें।
