“ जो रोज़ लौकी खाए,रोगों को दूर भगाए ”

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आयुर्वेदिक ग्रंथों में लौकी (चरक संहिता) औषधि बताया है

आमतौर पर लोग लौकी को एक “बोरिंग सब्जी” मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह एक ऐसी औषधीय वनस्पति है जो शरीर को अंदर से शुद्ध, शांत और संतुलित बनाती है। लौकी सिर्फ पाचन के लिए ही नहीं, बल्कि हृदय, यकृत, किडनी और त्वचा के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

आयुर्वेद में लौकी का वर्णन:आयुर्वेद में लौकी को शीतल, मधुर, मूत्रल, हल्की और पचने में आसान बताया गया है। इसे ‘कुष्मांड वर्ग’ की औषधीय सब्जियों में गिना जाता है।गुणधर्म (Properties):रस (स्वाद): मधुर (मीठा)वीर्य (ऊर्जा): शीत (ठंडी प्रकृति)विपाक (पाचन के बाद प्रभाव): मधुरदोष प्रभाव: पित्त और वायु को शांत करता है। लौकी खाने के 10 जबरदस्त आयुर्वेदिक फायदे:

1. पाचन तंत्र का रक्षक:लौकी अत्यंत हल्की और जल्दी पचने वाली होती है। इसमें घुलनशील फाइबर होता है जो कब्ज, गैस और एसिडिटी से राहत देता है।घरेलू उपाय: पेट खराब हो तो उबली हुई लौकी में जीरा और सेंधा नमक डालकर खाएं।

2. शरीर की गर्मी और पित्त को शमन:शरीर में अति पित्त या गर्मी बढ़ने पर लौकी अत्यंत लाभकारी है। खासकर गर्मी और बरसात के मौसम में।

3. हृदय का टॉनिक:लौकी में मौजूद पोटेशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते हैं और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होते हैं।

4. मानसिक तनाव और नींद में सुधार:लौकी का रस या हलकी सब्ज़ी तनाव, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन दूर करती है।आयुर्वेदिक नुस्खा: रात को लौकी की हल्की खिचड़ी लेने से नींद अच्छी आती है।

5. लिवर डिटॉक्स और किडनी को राहत:लौकी मूत्रवर्धक होती है, जो टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और किडनी को साफ करने में मदद करती है। यह लीवर से जुड़ी समस्याओं में भी उपयोगी है।

6. डायबिटीज में सहायक:लौकी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है।नोट: शुगर के मरीज लौकी का कच्चा रस डॉक्टर से पूछकर ही लें।

7. स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए उत्तम:लौकी का सेवन दूध बढ़ाने में सहायक होता है। यह थकावट और कमजोरी को भी दूर करता है।

8. वज़न घटाने में मददगार:कम कैलोरी, ज़ीरो फैट और हाई फाइबर वाली लौकी वजन घटाने वालों की पहली पसंद होनी चाहिए।लौकी सूप या लौकी जूस इस कार्य में अद्भुत है।

9. त्वचा को अंदर से निखारे:लौकी में विटामिन C और Zinc होता है, जो त्वचा की सूजन और दाग-धब्बों को कम करता है।

10. बुखार, जलन और पेशाब की जलन में राहत:लौकी ठंडी प्रकृति की होती है, इसलिए यह बुखार, पेशाब में जलन और डिहाइड्रेशन में राहत देती है।

कैसे करें लौकी का सेवन —

आयुर्वेदिक तरीके:- प्रकार विधि विशेष लाभलौकी की सब्ज़ी बिना तेल-मसाले के धीमी आंच पर पकाई हुई पाचन और बुखार में असरदारलौकी का सूप उबालकर छना हुआ वजन कम करने और थकावट दूर करने के लिएलौकी का रस सुबह खाली पेट 50-100ml उच्च रक्तचाप, पित्त और मानसिक तनाव के लिएलौकी की खिचड़ी मूंग दाल के साथ हल्के मसाले में ले।

कमजोर पाचन वालों के लिए लौकी रस लेने की सावधानियां:कभी भी कड़वी लौकी का रस न लें। इससे फूड पॉइज़निंग हो सकती है।रस पीने से पहले लौकी चख लें।रोज़ अधिक मात्रा में रस न पिएं (100ml पर्याप्त)।शुगर मरीजों और हृदय रोगियों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में लौकी:चरक संहिता:

लौकी को वात-पित्त शमन करने वाली औषधि बताया गया है।भावप्रकाश निघण्टु: इसे “अल्पोष्ण, मूत्रल और दाह-हर” बताया गया है।सुश्रुत संहिता: लौकी को गर्मी और जलन के रोगों में उपयोगी बताया गया है।

निष्कर्ष:- लौकी केवल एक सस्ती सब्ज़ी नहीं, बल्कि एक आयुर्वेदिक औषधि है।अगर आप थकावट, पाचन की खराबी, वजन बढ़ना, ब्लड प्रेशर या तनाव से जूझ रहे हैं — तो रोज़ की थाली में लौकी ज़रूर शामिल करें।कहावत याद रखें: “जो रोज़ लौकी खाए, रोग को दूर भगाए।”

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