सोयाबीन में फलियां कम एवं दाना भराव कमजोर हो तो अपनाएं ये उपाय

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वर्तमान समय में सोयाबीन की फसल फूल, फली निर्माण एवं दाना भराव की महत्वपूर्ण अवस्था में है। कई क्षेत्रों में किसानों द्वारा फूल एवं छोटी फलियों का डाड़ना, फलियाँ कम बनना तथा फलियों में दानों का समुचित भराव न होना जैसी समस्याएँ देखी जा रही हैं। जिसके कारण जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों के हितार्थ एक महत्वूपर्ण प्रदान की है। दरअसल डॉ. आराधना कुमारी एवं डॉ. ज्ञानेंद्र तिवारी, विभागाध्यक्ष, पादप कार्यिकी विभाग के अनुसार अत्यधिक वर्षा अथवा सूखे की स्थिति, तापमान में उतार-चढ़ाव, पोषक तत्वों की कमी तथा पौधों पर शारीरिक तनाव के कारण फूल एवं फलियों का झड़ना बढ़ सकता है और दाना भराव प्रभावित हो सकता है।फूल एवं छोटी फलियों का झड़ना कम करने तथा फली धारण में सुधार के लिए उपयुक्त अवस्था में NAA 20-40 ppm का पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है। प्रतिकूल मौसम एवं नमी के तनाव की स्थिति में थायोयूरिया 750 ppm (0.75 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव पौधों की शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में सहायक हो सकता है। फली बनने एवं दाना भरने के समय पौधे को पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। आवश्यकता के अनुसार जल में घुलनशील NPK 19:19:19 अथवा 17:44:00 0-5 प्रतिशत (5 ग्राम/लीटर पानी) का पर्णीय छिडकाव किया जा सकता है। बोरॉन एवं जिंक फूल, परागण, प्रजनन वृद्धि एवं विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी कमी वाले खेतों में मिट्टी अथवा पौध परीक्षण एवं स्थानीय अनुशंसा के आधार पर इन सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग किया जाना चाहिए। दाना भराव के समय पोटैशियम पौधे में प्रकाश संश्लेषित पदार्थों के स्थानांतरण तथा जल संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निमाता है। नमी के तनाव की स्थिति में आवश्यकता के अनुसार KNO, 1 प्रतिशत (10 ग्राम/लीटर पानी) का पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है।इस अवस्था में पौधों की हरी एवं स्वस्थ पत्तियों को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखना विशेष रूप से आवश्यक है, क्योंकि पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण से बने पदार्थ ही विकसित हो रही फलियों एवं दानों तक पहुँचते हैं। इसलिए कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करें तथा आवश्यकता होने पर अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाएँ। फली निर्माण से लेकर दाना भराव तक खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव बिल्कुल न होने दें। अधिक पानी होने पर खेत से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करें, जबकि लंबे समय तक वर्षा न होने पर उपलब्धता के अनुसार जीवनरक्षक सिंचाई करें। विशेष सावधानीः पादप वृद्धि नियामक (PGR), सूक्ष्म पोषक तत्व एवं उर्वरकों की अधिक मात्रा लाभ के बजाय फसल को नुकसान पहुँचा सकती है। विभिन्न रसायनों को बिना उनकी अनुकूलता की जानकारी के एक ही टंकी में मिलाकर छिड़काव न करें। व्यावसायिक च्छत की मात्रा उसमें उपस्थित सक्रिय तत्व की सांद्रता तथा उत्पाद के लेबल एवं कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा के अनुसार ही निर्धारित करें।

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