राहुल गाँधी,घोर अज्ञानी, वो सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता वाले -अविमुक्तेश्वरानंद

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तडकीले-भडकीले शंकराचार्य का गुस्सा, मैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को विवादास्पद होते हुए भी उतना ही सम्मान देता हूँ जितना उनके गुरु स्वर्गीय शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी को देता था. मैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इसलिए भी पसंद करता हूं क्योंकि वे तडकीले भी हैं और भडकीले. वे जब भडकते हैं तो कोई भेदभाव नहीं करते.फिर उनके निशाने पर प्रधानमंत्री हो, मुख्यमंत्री हो या कोई और. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर भी भडके.शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने कहा कि मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों पर दिया गया बयान उनकी घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परम्परा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है. शंकराचार्य ने राहुल गांधी को चेतावनी दी है कि धर्मविरोधी बयानबाजी नहीं करें.उन्होंने कहा, ”राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को सन्दर्भ से काटकर पेश करना केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान ही नहीं, बल्कि समाज को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास है.”महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा था, “महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है और आज हमारी लड़ाई इसी माइंडसेट से है. भाजपा और आर एस एस के लोग चाहते हैं कि लड़कियां/महिलाएं पिंजरे में बंद रहें, लेकिन हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते.”राहुल गांधी की टिप्पणी पर शंकराचार्य जी का भडकना स्वाभाविक है. भाजपा और संघ के पास स्वामी जी जैसा गांभीर्य नही है.मनु स्मृति को लेकर मैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी की प्रतिक्रिया को नाजायज नहीं मानता, लेकिन जरूरी भी नहीं मानता. क्योंकि राहुल की टिप्पणी धर्म से कहीं ज्यादा धर्म की राजनीति करने वालों को लेकर थी.स्वामीजी मनुस्मृति के विरोधी हो भी नहीं सकते. होना भी नहीं चाहिए अन्यथा उन्हे पूछेगा कौन?राहुल गांधी जी धार्मिक नेता नहीं है. वे किसी भी सूरत में मनु स्मृति की वैसी व्याख्या नहीं कर सकते जैसी कि स्वामी जी कर रहे हैं या कर सकते हैं. इसलिए स्वामीजी को राहुल गांधी की टिप्पणी धर्म पर नहीं ब्कि मानसिकता पर ही देखना चाहिए थी. लेकिन शंकराचार्य जी की भी तो विवशता है. वे नहीं बोलेंगे तो उनकी तडक-भडक कैसे कायम रहेगी? भारत में अधिमान्य शंकराचार्य 4 ही हैं, बाकी तो स्वंयभू हैं. ले शेष 3 अधिमान्य शंकराचार्यों ने मनु स्मृति के हवाले से की गई राहुल गांधी की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि वे जानते हैं कि आजकल जब राजा राम तक धर्म का हथियार बने हुए हैं ऐसे में मनुस्मृति कहाँ ठहरती है?राहुल गांधी की मनुस्मृति के हवाले से की गई टिप्पणी से राहुल गांधी या कांग्रेस का तो कोई नुक्सान नही हुआ लेकिन ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाली भाजपा को लाभ अवश्य होगा. भाजपा कह सकेगी कि राहुल गांधी धर्म विरोधी हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी जानते हैं कि आज देश या समाज मनुस्मृति से किसी सूरत नहीं चल सकता. 2200 साल पुरानी मनुस्मृति भारतीय संविधान नहीं बन सकती.मनुस्मृति पर प्रहार करने के लिए राहुल गांधी की क्लास लेकर धर्म और किसी भी धर्मग्रंथ की रक्षा नहीं हो सकती. आज समाज में नारी की जो स्थिति है वो किसी से नहीं छिपी. कोई स्मृति नारी का सम्मान नहीं बचा सकती. न मनुस्मृति और न कोई दूसरी स्मृति.शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी जाने, अनजाने उसी भाजपा के पैरोकार बन गए हैं, जिसकी सरकार ने महाकुम्भ में स्वामीजी की थुक्का फजीहत की थी.’स्वामी जी के हिसाब से ‘राहुल गांधी को यह राजनीतिक भ्रम भी व्याप्त है कि भारतीय जनता पार्टी मनुस्मृति की समर्थक पार्टी है, जबकि यह पूर्णतः निराधार और सत्य से परे है. मुझे समझ में नही आता कि स्वामी जी को किस वजह से भाजपा को ये तमगा देने की जरुरत क्यों आन पडी?जबकि स्वामी जी खुद कहते हैं कि स्वतन्त्र भारत का शासन और किसी भी राजनीतिक व्यवस्था का संचालन केवल भारत के संविधान से होता है. शंकराचार्य की ये ‘चेतावनी भी हास्यास्पद है कि यदि राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी बिना पूर्ण शास्त्रीय अध्ययन और बोध के सनातन धर्मग्रन्थों पर इसी प्रकार भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणियां करते रहे, तो देश का प्रबुद्ध और सनातनप्रेमी समाज उनकी इस वैचारिक अपरिपक्वता का तीव्र और मुखर विरोध जारी रखेगा.क्या स्वामीजी परोक्ष रूप से ये कहना चाहते हैं कि भाजपा सनातन धर्म और धर्मग्रंथों की शास्त्रीय टिप्पणी करती है?बेहतर यही है कि शंकराचार्य भगवान राजनीति से असंपृक्त रहेंअन्यथा उनकी भी वही दशा हो सकती है जो जगदगुरु रामभद्राचार्य जी की हो रही है. सबको अपनी -अपनी लक्ष्मण रेखाएं पहचान कर ही आगे बढें.

वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल

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