जुन्नारदेव रेलवे स्टेशन का आधुनिक रूपांतरण, बेहतर यात्री सुविधाओं से हुआ सुसज्जित

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मध्य रेल के नागपुर मंडल स्थित जुन्नारदेव रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कर इसे आधुनिक एवं यात्री-अनुकूल रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किया गया है। भारतीय रेल की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना (ABSS) के अंतर्गत इस स्टेशन को शीघ्र ही राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा।₹25.40 करोड़ की स्वीकृत लागत से किए गए इस पुनर्विकास परियोजना का उद्देश्य यात्रियों के आराम एवं सुविधा में वृद्धि, सुगम पहुँच सुनिश्चित करना, स्टेशन अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना तथा स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।

जुन्नारदेव – इतिहास एवं महत्व-

मध्य रेल के नागपुर मंडल के अंतर्गत आने वाला जुन्नारदेव रेलवे स्टेशन एनएसजी-5 श्रेणी का स्टेशन है, जिसमें तीन प्लेटफॉर्म हैं तथा प्रतिदिन 10 ट्रेनों (5 अप एवं 5 डाउन) का संचालन होता है। वर्तमान में इस स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 2,867 यात्री आवागमन करते हैं।इस स्टेशन का गौरवशाली इतिहास स्वतंत्रता-पूर्व काल से जुड़ा हुआ है। मध्य भारत में रेलवे नेटवर्क के विस्तार के दौरान स्थापित इस स्टेशन का वर्तमान भवन वर्ष 1936 में नागपुर–बालाघाट रेलखंड पर निर्मित किया गया था, जिसने इस क्षेत्र को देश के अन्य भागों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।जुन्नारदेव, छिंदवाड़ा जिले की जमई तहसील की सेवा करता है तथा दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश के पर्यटन एवं औद्योगिक क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार है। यह स्टेशन तमिया हिल्स, पातालकोट घाटी, पहली पायरी, करंजी जलप्रपात तथा हिंगलाज माता मंदिर जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क प्रदान करता है, जिससे देशभर से पर्यटक यहाँ आते हैं।यह नगर वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के कन्हान क्षेत्र का मुख्यालय भी है, जहाँ एशिया का सबसे बड़ा कोयला वॉशरी संयंत्र तथा लगभग 15 कोयला खदानें स्थित हैं। इस कारण यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र भी है।पिछले एक दशक में जुन्नारदेव स्टेशन पर यात्री संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2015–16 में प्रतिदिन औसतन 970 यात्रियों की तुलना में वर्ष 2025–26 में यह संख्या बढ़कर 2,867 हो गई है, अर्थात लगभग 2.9 गुना वृद्धि हुई है। यात्री संख्या में इस वृद्धि तथा पर्यटन स्थल के रूप में स्टेशन के बढ़ते महत्व को देखते हुए आधुनिक यात्री सुविधाओं एवं उन्नत अवसंरचना के साथ स्टेशन का पुनर्विकास आवश्यक हो गया था।

प्रमुख पुनर्विकास कार्य-

12 मीटर चौड़ा एवं 121 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज, जिसमें 4 लिफ्ट एवं 4 रैंप की व्यवस्था।पोर्च सहित नया बुकिंग कार्यालय एवं प्रतीक्षालय।आरक्षित वातानुकूलित प्रतीक्षालय। वर्तमान फुट ओवर ब्रिज पर 2 अतिरिक्त लिफ्ट। 500 मीटर लंबे सर्कुलेटिंग एरिया मार्ग का विकास।समर्पित सर्कुलेटिंग एरिया सहित स्टेशन का दूसरा प्रवेश द्वार।मूर्तियों सहित आकर्षक लैंडस्केपिंग एवं उद्यान विकास।90 दोपहिया एवं 15 चारपहिया वाहनों हेतु आवृत पार्किंग।वर्तमान स्टेशन भवन का नवीनीकरण। अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शेड का निर्माण।दो शौचालय ब्लॉकों का निर्माण/नवीनीकरण। 300 मीटर लंबी परिधि दीवार का निर्माण।

वास्तुशिल्पीय विशेषताएँ-

आधुनिक स्टेशन डिज़ाइन, जिसमें स्थानीय संस्कृति एवं विरासत को दर्शाने वाले वास्तु तत्वों का समावेश किया गया है।

संपर्क सुविधा- मुख्य प्रवेश द्वार जुन्नारदेव–परासिया–छिंदवाड़ा मार्ग के माध्यम से छिंदवाड़ा से जुड़ा है।दूसरा प्रवेश द्वार तमिया बाईपास रोड से जुड़ा है, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और बेहतर हुआ है।

यात्रियों को होने वाले लाभ-यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा में वृद्धि।आधुनिक स्टेशन भवन, बेहतर बुकिंग एवं प्रतीक्षा सुविधाओं सहित। वातानुकूलित प्रतीक्षालय। 100 प्रतिशत दिव्यांगजन-अनुकूल एवं बाधारहित सुविधाएँ। चौड़े फुट ओवर ब्रिज के माध्यम से प्लेटफॉर्मों के बीच बेहतर आवागमन। विस्तारित प्लेटफॉर्म शेल्टर। बेहतर स्वच्छता एवं सफाई व्यवस्था। आसान मार्गदर्शन हेतु आधुनिक प्रकाशित संकेतक। सुव्यवस्थित सर्कुलेटिंग एरिया एवं पार्किंग सुविधाएँ।अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत जुन्नारदेव रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास, मध्य रेल की विश्वस्तरीय रेलवे अवसंरचना विकसित करने, क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने, औद्योगिक विकास को समर्थन प्रदान करने तथा यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं सुखद यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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