भाजपा की नई मुहिम दे रही 2029 के लिए बदलती रणनीति का संकेत,Gen-Z वोटरों पर बीजेपी का बड़ा दांव

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वायरस और कॉकरोच जैसी पार्टियां देश में आ रही और इन्हे बरगला रहीं

2029 के चुनावों को देखते हुए बीजेपी ने युवा मतदाताओं को साधने के लिए विशेष ‘आउटरीच प्रोग्राम’ शुरू किया है. इसके तहत पार्टी विपक्ष के बेरोजगारी और पेपर लीक के नैरेटिव का मुकाबला कर युवाओं को देश निर्माता के रूप में पेश कर रही है.देश में युवा मतदाताओं को साधने की कवायद तेज हो गई है. एक तरफ कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों पेपर लीक का मुद्दा उठाकर Gen-Z का विश्वास जीतने की कवायद में हैं. दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी भारत के सबसे युवा वोटरों की पॉलिटिकल सोच को आकार देने की अपनी कोशिशों को तेज़ कर रही है, जिसके तहत ‘आउटरीच प्रोग्राम’ प्रोग्राम शुरू किया है. इसके तहत पार्टी एक रणनीति के तहत यह बताने और सियासी संदेश देने में जुटी है कि देश के असली Gen-Z कौन हैं और उनकी उपयोगिता देश के लिए कितनी अहम है. पिछले दो महीने से बीजेपी लगातार अलग-अलग प्लेटफार्म के जरिए युवा मतदाताओं को सियासी संदेश दने की कवायद कर रही है. इस मुहिम की कमान 46 साल के बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने संभाल रखी है और अलग-अलग राज्यों में जाकर Gen-Z को परिभाषित करने और युवाओं की सकारात्मक छवि को पेश कर रहे हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मई में पहली बार असली Gen-Z को डिफाइन करने की बात कही थी. इसके बाद जून में बेंगलुरु साउथ के सांसद तेजस्वी सूर्या ने बेंगलुरु में युवा वोटरों के साथ बातचीत की थी. इसके कुछ दिनों बाद तेलंगाना के दौरे पर पहुंचे नितिन नवीन ने हैदराबाद में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए एक मैसेज दिया था. उन्होंने यह बताने का दांव चला था कि भारत के युवा एंटी-एस्टैब्लिशमेंट आवाजों के बजाय सकारात्मक दिशा में सोचते हैं, वे इनोवेटर और नेशन-मेकर हैं. नितिन नवीन और तेजस्वी सूर्य ने इंटरैक्टिव प्रोग्राम के ज़रिए युवाओं तक पहुंच बढ़ाई और और दोहराया कि ‘असली Gen Z’ देश के निर्माण पर फोकस करता है. कुल मिलाकर, ये इवेंट्स अहम राज्य चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले पहली बार वोट देने वालों और युवा शहरी भारतीयों के लिए एक बड़ी स्ट्रैटेजी की ओर इशारा करते हैं.बीजेपी ने अपने Gen-Z नैरेटिव को और तेज़ किया. 2024 के लोकसभा चुनाव में भारत के लगभग 18 फीसदी वोटर Gen-Z थे. अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 तक लाखों भारतीय युवा वोट देने के लायक हो जाएंगे. 2029 तक वोट देने वाली आबादी का लगभग 22 फीसदी Gen-Z का होगा, जो किसी भी पार्टी का चुनावी खेल बनाने या बिगाड़ने की स्थिति में होंगे. यह पीढ़ी देश के सबसे असरदार चुनावी ग्रुप में से एक बन जाएगी. Gen-Z के डिजिटल फुटप्रिंट और पब्लिक बातचीत को आकार देने की काबिलियत ने उन्हें हर बड़ी पार्टी की पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी का सेंटर बना दिया है. ‘असली Gen Z’ को फिर से परिभाषित करना साफ मैसेज है कि बीजेपी ने कैसे युवाओं पर अपना फोकस अभी से केंद्रित कर दिया है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हैदराबाद में तर्क दिया कि भारत के Gen-Z को सिर्फ़ विरोध की राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वह देश को मजबूत करने की अहम कड़ी है. ऐसे में उन्होंने कहा कि असली Gen-Z देश को कमजोर नहीं बल्कि देश को नई दिशा देता है. यह युवा संविधान या देश की संस्कृति पर सवाल नहीं उठाता. उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवा आज उद्यमी, इनोवेशन से प्रेरित और स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और खेल के ज़रिए भारत को सिर बुलंद कर रहे हैं. नितिन नवीन के मुताबित भारतीय युवाओं को ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग वाली सोच से परिभाषित नहीं किया जाता है. वारंगल में BJP बूथ अध्यक्षों के साथ एक मीटिंग के दौरान नितिन नवीन ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा था कि वायरस और कॉकरोच जैसी पार्टियां देश में आ रही हैं. ये वे लोग हैं जो देश को खोखला करना चाहते हैं. इन वायरस और कॉकरोच लोगों पर ध्यान देने की ज़रूरत है. यह गैंग देश को बांटना चाहता है’ उन्होंने कहा कि ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ सोच वाले लोग, जो देश को बांटने के नारे लगाते हैं और ‘देश के संविधान, संस्कृति और आत्मा’ पर सवाल उठाते हैं, ये भारत के Gen-Z को रिप्रेजेंट नहीं कर सकते, भारत का युवा ज़िम्मेदार और जागरूक है, और हमें उनकी एनर्जी का सही इस्तेमाल करने की ज़रूरत है.बीजेपी की युवा इमेज को बनाने का प्लानबीजेपी की सबसे बड़ी ताकत युवा रही है, जिनके सहारे लगातार तीन बार वह देश में सरकार बनाने में सफल रही है. इसके अलावा अलग-अलग राज्यों की चुनावी जंग बीजेपी जीतने में सफल रही थी. बीजेपी की युवा इमेज को फिर से बनाने की कोशिश है. बीजेपी के एक सीनियर नेता के मुताबिक इस नए आउटरीच का मुख्य मकसद इस सोच का मुकाबला करना भी है. सरकार युवा भारतीयों की चिंताओं को दूर करने में नाकाम रही है, इसी सोच ने बेरोज़गारी, भर्ती में देरी और परीक्षा में गड़बड़ियों जैसे मुद्दों पर विरोध को हवा दी है. बीजेपी नेता ने बताया कि पार्टी ने अपने सहयोगियों के साथ केंद्र में सत्ता में 12 साल पूरे कर लिए हैं, लेकिन वह युवा वोटरों के साथ अपना जुड़ाव बढ़ाना चाहती है, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं, किसानों और गरीबों के साथ पार्टी के चार खास सामाजिक वोटरों में से एक के रूप में पहचाना है. Gen-Z का मतलब सिर्फ़ वे लोग नहीं हैं, जो सरकार के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट करते हैं बल्कि वे लोग भी हैं जो देश बनाने और डेवलपमेंट में पूरी लगन से लगे हुए हैं. बीजेपी क्या युवाओं के बीच रख पाएगी पकड़भारत के Gen-Z स्टार्टअप बनाने और डेवलपमेंट के लिए AI का इस्तेमाल करने में काबिल हैं, वे गलतियों को सुधारने के लिए प्रोटेस्ट भी कर सकते हैं. जम्मू-कश्मीर में, युवा पत्थर फेंक रहे थे, और आज वे रणजी ट्रॉफी जीत रहे हैं. उन्हें एक साथ रखना और Gen Z को सिर्फ़ प्रोटेस्टर और एंटी-एस्टैब्लिशमेंट के तौर पर देखना गलत होगा है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने के लिए BJP का कैंपेन ऐसे समय में आया है जब विपक्षी पार्टियां बेरोज़गारी, महंगाई, पेपर लीक, भर्ती में देरी और आर्थिक मौकों की चिंताओं के इर्द-गिर्द युवा वोटरों को इकट्ठा करने की कोशिश कर रही हैं. पिछले दो सालों में, विपक्षी नेताओं ने बार-बार Gen-Z को नौकरियों और शिक्षा के मैनेजमेंट से निराश पीढ़ी के तौर पर पेश किया है, यह तर्क देते हुए कि बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता पहली बार वोट देने वालों के बीच राजनीतिक नाराज़गी में बदल गई है. एक और BJP लीडर ने आजतक को बताया कि पार्टी युवा वोटरों को अलग-थलग करने के राजनीतिक नतीजों को अच्छी तरह जानती है.

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