डिंडोरी एवं अनूपपुर के 109 ग्रामों की पेयजल समस्या समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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NAQUIM 2.0 के अंतर्गत स्प्रिंगशेड प्रबंधन अध्ययन पर कार्यशाला संपन्न डिंडोरी एवं अनूपपुर के 109 ग्रामों की पेयजल समस्या समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल डिंडौरी : 19 फरवरी, 2026डिंडोरी – अनूपपुर जिलों के लिए Central Ground Water Boar (सीजीडब्ल्यूबी) द्वारा NAQUIM 2.0 के अंतर्गत तैयार स्प्रिंगशेड प्रबंधन अध्ययन पर गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को डिंडौरी में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने की।बैठक में अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत श्री पंकज जैन सहित पीएचईडी, डब्ल्यूआरडी, मनरेगा, वॉटरशेड, पीएमकेएसवाई, डूडा, नगर पालिका, उद्यानिकी, कृषि, जल निगम, डीडीए, डीटीआईसी एवं विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।वैज्ञानिक श्री चित्तरंजन बिस्वाल एवं सुश्री सौम्या सिद्धार्थ द्वारा स्प्रिंगशेड प्रबंधन अध्ययन का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। सीजीडब्ल्यूबी, उत्तर मध्य क्षेत्र, भोपाल द्वारा NAQUIM 2.0 के अंतर्गत अनूपपुर एवं डिंडोरी जिलों के लगभग 1350 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में अध्ययन पूर्ण किया गया है। अध्ययन क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति पाई गई है।अध्ययन के अंतर्गत पहली बार व्यवस्थित रूप से स्प्रिंग्स का मानचित्रण एवं इन्वेंटरी तैयार की गई। 1;10,000 पैमाने पर किए गए सर्वेक्षण में 149 स्प्रिंग्स का चिन्हांकन किया गया तथा 14 स्प्रिंगशेड का सीमांकन किया गया। स्प्रिंग्स का वर्गीकरण भू-वैज्ञानिक संरचना, जलप्रवाह (डिस्चार्ज) एवं परिवर्तनशीलता के आधार पर किया गया।अध्ययन में 95 जल-संकटग्रस्त ग्रामों (कुल जनसंख्या 71,228) की पहचान की गई है। संभावित पेयजल आपूर्ति के लिए 139 उपयुक्त स्थलों पर कुओं के निर्माण की संभावना चिन्हित की गई है। इसके अतिरिक्त 31 स्प्रिंग्स को पेयजल आपूर्ति हेतु विकसित करने का प्रस्ताव है, जिन पर स्प्रिंग बॉक्स निर्माण, स्लो-सैंड फिल्ट्रेशन प्रणाली एवं नियंत्रित आपूर्ति व्यवस्था की अनुशंसा की गई है। जलागम क्षेत्र संरक्षण एवं गहन वनीकरण भी प्रस्तावित है।स्प्रिंग्स के पुनर्जीवन के लिए 25,502 गली प्लग एवं 2 चेक डैम निर्माण का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे जलस्रोतों का प्रवाह सतत बना रहे। दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बोरवेल निर्माण के उपयुक्त डिज़ाइन भी सुझाए गए हैं।कार्यशाला में रूफटॉप वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर एवं गुणवत्ता संबंधी आंकड़ों, तथा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की जानकारी साझा की गई। साथ ही Central Ground Water Authority (सीजीडब्ल्यूए) के भूजल दोहन संबंधी नियामक प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला गया।कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए की केंद्रीय भू-जल बोर्ड के द्वारा नोडल नियुक्त किये गये है जो डिंडौरी जिले की भू-जल समस्या आने पर इनका विशेष सहयोग के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार पेयजल पूर्ति की जा सकती है। इसलिए पीएचई और जल निगम संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर जिले में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ करने के निर्देश दिए। साथ ही साथ भूजल संरक्षण वैज्ञानिक श्री चित्तरंजन बिस्वाल एवं सुश्री सौम्या सिद्धार्थ द्वारा स्प्रिंगशेड प्रबंधन से संबंधित नक्सा और पुस्तक जिले से संबंधित कलेक्टर को भेंट की।कलेक्टर ने अध्ययन की सराहना करते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने एवं संस्तुतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने सीजीडब्ल्यूबी के साथ सतत समन्वय बनाए रखने पर बल देते हुए जिला प्रशासन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।अध्ययन के क्रियान्वयन से डिंडोरी जिले के 56 ग्रामों में पेयजल समस्या के समाधान की उम्मीद है। साथ ही सूखते स्प्रिंग्स के पुनर्जीवन एवं भूजल प्रबंधन के वैज्ञानिक एवं स्थायी समाधान की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

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