आदिवासी अंचलों की पारंपरिक कृषि विरासत के संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि-कुलपति डॉ. पी.के. मिश्रा

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मध्यप्रदेश की चार पारंपरिक कृषि किस्मों को मिला जीआई टैग

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर एवं किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त प्रयासों से कृषि जैव विविधता एवं पारंपरिक फसलों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। मध्यप्रदेश की चार विशिष्ट पारंपरिक कृषि किस्मों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर एवं छत्रिय धान को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication जीआई टैग प्रदान किया गया है। इन किस्मों के लिए जीआई रजिस्ट्री कार्यालय, चेन्नई द्वारा दिनांक 25 जून, 2026 को जीआई टैग प्रदान किए जाने संबंधी अधिसूचना जारी की गई है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि मिलने से कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रदेश की समृद्ध कृषि विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं राष्ट्रीय अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर उसकी विशिष्ट पहचान स्थापित करने हेतु मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह उपलब्धि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों के सतत प्रयासों का परिणाम है। कुलपति डॉ. मिश्रा ने इसे प्रदेश एवं विशेष रूप से आदिवासी अंचलों की पारंपरिक कृषि विरासत के संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग से इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होगी तथा किसानों को बेहतर बाजार एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे।
यह महत्वूपर्ण कार्य पूर्व संचालक अनुसंधान डॉ. जी. के. कौतु के मार्गदर्शन एवं निर्देशों के अनुरूप प्रारंभ किया गया था, जिनकी प्रेरणा एवं दूरदृष्टि ने स्थानीय जैव विविधता तथा पारंपरिक फसल किस्मों के संरक्षण को नई दिशा प्रदान की। वर्तमान संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. ए. के. जैन ने भी इस पहल को निरंतर संस्थागत सहयोग एवं प्रोत्साहन प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश की इन विशिष्ट कृषि उपजों को जीआई टैग प्राप्त हो सका। जीआई सेल के प्रधान अन्वेषक डॉ. आशीष कुमार, डॉ. स्तुति शर्मा, डॉ. शिवरामकृष्णन एवं सहयोगी वैज्ञानिकों डॉ. राधे श्याम शर्मा तथा डिंडोरी से डॉ. मनीषा श्याम, डॉ. डी. एन. श्रीवास के नेतृत्व में व्यापक दस्तावेजीकरण, ऐतिहासिक साक्ष्यों, पारंपरिक ज्ञान तथा तकनीकी जानकारियों का संकलन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण हो सकी।
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड, भोपाल के वित्तीय सहयोग से जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर में प्रदेश के प्रथम जीआई सेल की स्थापना की गई। इसी जीआई सेल के माध्यम से सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी, बैगानी अरहर एवं छत्रिय धान के जीआई पंजीकरण की महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई। इस उपलब्धि में निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. टी. आर. शर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र, डिंडोरी के प्रमुख डॉ. पी. एल. अंबुलकर तथा कृषि विज्ञान केंद्र, कटनी से डॉ. संजय वैषम्पायन, डॉ. बैन का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ। इन सभी ने जीआई टैग हेतु आवश्यक दस्तावेजों, ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थानीय परंपरागत ज्ञान एवं अन्य प्रमाणों के संकलन तथा सत्यापन में सक्रिय योगदान दिया, जिससे जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सका।

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